धनतेरस, जिसे धन त्रयोदशी भी कहा जाता है, दीपावली महापर्व की शुरुआत का प्रतीक है. यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है और इस बार यह 18 अक्टूबर 2025, शनिवार को मनाया जाएगा. मान्यता है कि इसी दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे. इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर, और आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है.
लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र ने बताया कि, “धनतेरस पर की गई पूजा और खरीदी अगले वर्ष भर की सुख-समृद्धि को सुनिश्चित करती है. विशेषकर झाड़ू की खरीदारी से दरिद्रता का नाश होता है. इस दिन कुबेर यंत्र और गोमती चक्र को घर लाकर पूजन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. वे आगे कहते हैं, लाभ और अमृत चौघड़िया में खरीदी करने से वस्तुएं चिरस्थायी होती हैं और शुभ फल देती हैं. पूजन में केसर, कमलगट्टा, और सफेद मिठाई का प्रयोग अवश्य करें.
पूजन मुहूर्त
उमाशंकर मिश्र के अनुसार, शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक, इस समय मां लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देवता की विधिवत पूजा कर धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है. दीप प्रज्ज्वलन, लक्ष्मी स्तोत्र, और कुबेर मंत्रों का जाप विशेष फलदायक माना जाता है.
खरीदारी के शुभ मुहूर्त
धनतेरस के दिन विशेष वस्तुएं खरीदने की परंपरा है, जैसे कि सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू और नए उपकरण. आइए जानते हैं दिनभर के खरीदारी के श्रेष्ठ समय:
- प्रथम मुहूर्त: सुबह 8:50 बजे से 10:33 बजे तक
- द्वितीय मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
- तृतीय मुहूर्त: शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक
चौघड़िया मुहूर्त
- शुभ काल: सुबह 7:49 बजे से 9:15 बजे तक
- लाभ काल: दोपहर 1:32 बजे से 2:57 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 2:57 बजे से शाम 4:23 बजे तक
- चर काल: दोपहर 12:06 बजे से 1:32 बजे तक
इन चीजों को खरीदने से करें परहेज
धनतेरस पर कुछ वस्तुएं अशुभ मानी जाती हैं. जैसे
- काले रंग के वस्त्र
- तेल
- प्लास्टिक की वस्तुएं
- कांच के बर्तन
- जूते-चप्पल
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि, धनतेरस सिर्फ खरीदारी का दिन नहीं, बल्कि आरोग्य, धन और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का शुभ पर्व है. सही मुहूर्त में पूजा और संयमित क्रय से जीवन में स्थायी सुख-समृद्धि आती है.


