देवघर: झारखंड को जंगलों और पहाड़ों की रक्षा के उद्देश्य से राज्य का दर्जा मिला था लेकिन आज इन्हीं जंगलों की सांसें काटने का सिलसिला जारी है. झारखंड की पहचान रहे घने वन और विशाल वृक्ष अब कुछ मुनाफाखोरों के निशाने पर हैं.
- दरअसल, देवघर जिले के कई प्रखंडों सारठ, पालोजोरी और सारवां में धड़ल्ले से अवैध आरा मिल संचालित किए जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन इलाकों में पचास से अधिक ऐसे आरा मिल खुलेआम चल रहे हैं, यहां पुराने और विशाल वृक्षों को काटा जा रहा है. जंगल की खामोशी अब लकड़ी काटने वाली मशीनों के शोर में दबती जा रही है. वन विभाग की निगरानी यहां पहुंचनी चाहिए, वहां अक्सर मौन पसरा रहता है.
विभाग ने विशेष अभियान के तहत 21 अधिकृत आरा मिलों को चिन्हित किया है जबकि बाकी सभी मिल राज्य की राजस्व और पर्यावरण दोनों को चूना लगा रही हैं. उन्होंने बताया कि विभागीय टीम लगातार छापेमारी कर रही है और अब तक कई अवैध मिलों को सील किया जा चुका है. हाल ही में एक आरोपी को अदालत ने दो साल की सजा भी सुनाई है: अभिषेक भूषण, जिला वन पदाधिकारी.
‘गश्ती दलों की संख्या बढ़ाई जाएगी’
इसके साथ ही वन विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में गश्ती दलों की संख्या बढ़ाई जाएगी और कार्रवाई की रफ्तार तेज की जाएगी. सवाल यही है कि जब तक कार्रवाई की धार जमीनी हकीकत तक नहीं पहुंचेगी, तब तक जंगलों की हरियाली पर खतरा बना रहेगा. संथाल परगना के अनेक क्षेत्रों में अब भी सैकड़ों साल पुराने वृक्ष मौजूद हैं, जिनकी लकड़ी लाखों रुपये में बिकती है. इन्हीं वृक्षों को निशाना बनाकर लकड़ी माफिया खुलेआम मनमानी कर रहे हैं. इस पूरे कारोबार में वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है.


