देवघर: झारखंड में आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत कभी गर्व के साथ हुई थी लेकिन आज प्रदेश के देवघर में वही योजना अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है. योजना का मूल उद्देश्य, स्वास्थ्य सुविधा बहाल कराने के साथ साथ लोगों को आर्थिक मदद देना और ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में बदलकर गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना था लेकिन हकीकत इससे ठीक उलट है. देवघर जिले में आयुष्मान आरोग्य मंदिर भवन में ताला लगा हुआ है और यहां के स्थानीय ग्रामीण इलाज के अधिकार से वंचित हैं.
- देवघर के मधुपुर अनुमंडल के महुआ डाबर गांव में आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ताला लगा हुआ है. देवघर जिले में कुल 183 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिनमें से लगभग 100 को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में अपग्रेड किया गया है. नियम के मुताबिक, प्रत्येक आरोग्य मंदिर में एक सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, एक एएनएम और एक एमपीडब्ल्यू की नियुक्ति अनिवार्य है पर हकीकत यह है कि आधे से ज्यादा केंद्रों में दो कर्मी भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं.
ग्रामीणों के मुताबिक, सप्ताह में सिर्फ एक या दो दिन ही केंद्र खुलते हैं और बाकी दिनों में ताला लगा रहता है और लोग मजबूरी में शहर या अनुमंडल मुख्यालय जाकर अपना इलाज कराते हैं. सर्दी-खांसी, बुखार से लेकर ब्लड प्रेशर और शुगर जांच जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं.
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के बंद रहने से आम जनता को भारी परेशानी होती है. मैनपावर और संसाधन संबंधी समस्याएं गंभीर हैं लेकिन अधिकारियों के साथ लगातार बैठकों में समाधान की दिशा में प्रयास चल रहे हैं और जल्द ही देवघर के सभी आयुष्मान आरोग्यम केंद्रों को सुचारु कर दिया जाएगा: डॉ. युगल किशोर चौधरी, सिविल सर्जन


