Wednesday, January 28, 2026

दरभंगा के श्रेयांस झा एशिया अंडर-15 स्क्वैश रैंकिंग में नंबर वन बन गए है.

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दरभंगा: भारत के उभरते स्क्वैश खिलाड़ी श्रेयांस झा ने इंडिया जूनियर ओपन का खिताब जीतकर मिथिलांचल ही नहीं पूरे राज्य का नाम रोशन किया है. इस उपलब्धि पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर उन्हें बधाई दी है.

श्रेयांस की उपलब्धि: मिली जानकारी के अनुसार इससे पहले जुलाई 2025 में श्रेयांस ने जर्मनी में आयोजित यूरोपियन जूनियर ओपन स्क्वैश अंडर-15 खिताब जीतकर सबका ध्यान खींचा था. इसके अलावा उन्होंने इसी साल सेंट्रल इंडिया स्लैम, साउदर्न स्लैम और नॉर्दर्न स्लैम में पहला स्थान हासिल किया था. साथ ही 32वीं एशियन जूनियर चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर अपनी रैंकिंग को और मजबूत किया था.

मुंबई ट्रेनिंग ले रहे श्रेयांस: मिथिलांचल के दरभंगा निवासी श्रेयांस झा के पिता मृगांक शेखर झा भारतीय नेवी में कमांडर हैं, जबकि मां रश्मि झा शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी हैं. श्रेयांस फिलहाल मुंबई के बॉम्बे जिमखाना स्पोर्ट्स क्लब में कोच अविनाश भवनानी से ट्रेनिंग ले रहे हैं.

युवाओं के लिए प्रेरणा: श्रेयांस की यह उपलब्धि बिहार के खेलों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी और युवाओं को प्रेरित करेगी कि वे भी खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त कर राज्य और देश का नाम रोशन करें.

दरभंगा के श्री श्रेयांस झा को एशिया अंडर-15 स्क्वैश रैंकिंग में नंबर-1 स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई. मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं. मुझे विश्वास है कि वे अपनी प्रतिभा से पूरे विश्व में देश और राज्य का नाम रोशन करेंगे”. -नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री

श्रेयांस की मां सबसे बड़ी प्रेरणा स्त्रोत्र: श्रेयांस ने खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया है. श्रेयांस अपनी मां को अपना आइडल मानते हैं. श्रेयांस बतातें हैं कि मेरी मां ने अपने भविष्य से ज्यादा मेरे खेल पर ज्यादा ध्यान दिया है.

”मेरा सपना है कि मैं ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतकर देश का नाम रोशन करूं”. -श्रेयांस झा, विजेता, एशिया अंडर-15 स्क्वैश रैंकिंग

क्या है स्क्वैश खेल: स्क्वैश खेल चार दीवारों वाले कोर्ट में एक छोटी, खोखली रबर की गेंद के साथ खेला जाता है. इसमें दो या चार खिलाड़ी होते हैं. ये तेज-तर्रार वाला खेल है. इसमें खिलाड़ी बारी-बारी से गेंद को सामने की दीवार पर मारते हैं. गेंद को इस तरह मारना होता है कि प्रतिद्वंद्वी उसे वापस ना मार सके.

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