Friday, March 27, 2026

तुलसी विवाह के दिन भगवान शालिग्राम और माता तुलसी की पूजा की जाती है.

Share

 तुलसी विवाह का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. हर वर्ष कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को तुलसी विवाह कराया जाता है. तुलसी विवाह के दिन ही शालिग्राम भगवान के साथ माता तुलसी का विवाह करते हैं. बता दें कि शालिग्राम को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का रूप माना जाता है. साल 2025 में तुलसी विवाह कब और किस दिन है और आइए जानते हैं.

तुलसी विवाह की तिथि
हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का आरंभ 2 नवंबर को प्रात: 7.33 मिनट पर होगा. द्वादशी तिथि 3 नवंबर को प्रात: 2.07 मिनट पर खत्म हो जाएगी. वहीं 3 नवंबर को उदयातिथि में द्वादशी नहीं है, इस वजह से 2 नवंबर को ही तुलसी विवाह मनाया जाएगा.

  • ब्रह्म मुहूर्त- प्रात: 04:59 मिनट से 05:49 मिनट तक
  • अमृत काल- प्रात: 09:29 मिनट से 11:00 मिनट तक
  • अभिजित मुहूर्त- पूर्वाह्न 11:59 मिनट से, दोपहर 12:45 मिनट तक
  • गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:04 मिनट से 06:30 मिनट तक

इन शुभ मुहूर्तों में तुलसी विवाह कर सकते हैं.

तुलसी विवाह की पूजन विधि
तुलसी विवाह में फूल या साड़ियों से मंडप को तैयार किया जाता है. इसके बाद तुलसी के पौधे और भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान कराया जाता है. तत्पश्चात उन्हें फूल माला पहनाई जाती है. तुलसी विवाह में तुलसी जी का सोलह श्रृंगार किए जाने के साथ ही भगवान विष्णु के शालिग्राम को धोती पहनाई जाती है. तत्पश्चात तुलसी जी और भगवान विष्णु को धागे से बांधा जाता है.

तुलसी विवाह की अहमियत
तुलसी विवाह के दिन भगवान शालिग्राम को दूल्हे की तरह सजाकर उनका विवाह माता तुलसी किया जाता है. वहीं शालिग्राम जहां ईश्वरीय शक्ति का प्रतीक हैं तो तुलसी माता को प्रकृति का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में तुलसी और शालिग्राम का विवाह प्रकृति और ईश्वर के बीच एकरूपता और मनुष्य के जीवन में इन दोनों (ईश्वरीय शक्ति और प्रकृति) के महत्व को दिखाता है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक तुलसी विवाह को पारंपरिक रूप से करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है.

Read more

Local News