मुंबई : चालू वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर 13.2 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.3 प्रतिशत हो गया. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था. यह वृद्धि मुख्य रूप से व्यापार घाटा बढ़ने के कारण हुई है.
हालांकि, चालू खाते का घाटा अप्रैल-दिसंबर, 2025 की अवधि में घटकर 30.1 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का एक प्रतिशत) रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 36.6 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) था.
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, ‘‘भारत का चालू खाते का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 13.2 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.3 प्रतिशत) हो गया है, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में 11.3 अरब अमेरिकी डॉलर (जीडीपी का 1.1 प्रतिशत) था.
समीक्षाधीन तिमाही में वस्तु व्यापार घाटा 93.6 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 79.3 अरब अमेरिकी डॉलर था. भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया कि इस अवधि के दौरान शुद्ध सेवा प्राप्तियां बढ़कर 57.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गईं, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 51.2 अरब डॉलर थीं.कंप्यूटर सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं जैसी प्रमुख श्रेणियों में सेवाओं के निर्यात में वार्षिक आधार पर वृद्धि हुई है,
आरबीआई ने कहा कि प्राथमिक आय खाते पर शुद्ध व्यय घटकर 12.2 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 16.4 अरब डॉलर था। यह मुख्य रूप से निवेश आय के भुगतान को दर्शाता है. वहीं, द्वितीयक आय खाते के तहत व्यक्तिगत हस्तांतरण प्राप्तियां बढ़कर 36.9 अरब डॉलर हो गईं, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 35.1 अरब डॉलर थीं. यह मुख्य रूप से दूसरे देशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा देश में भेजे जाने धन यानी रेमिटेंस को दर्शाता है.
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में इस तिमाही में शुद्ध बहिर्वाह 3.7 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यह 2.8 अरब डॉलर था. समीक्षाधीन तिमाही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) में 20 करोड़ डॉलर का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में यह 11.4 अरब डॉलर था.
हालांकि, अनिवासी जमा (एनआरआई जमा) में 5.1 अरब डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 3.1 अरब डॉलर था. भारत में बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) के तहत शुद्ध प्रवाह 3.3 अरब डॉलर रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में हुए 4.4 अरब अमेरिकी डॉलर के शुद्ध प्रवाह से कम है.
समीक्षाधीन तिमाही के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार में 24.4 अरब डॉलर की कमी आई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 37.7 अरब डॉलर की कमी आई थी. दिसंबर, 2025 में समाप्त होने वाले नौ महीनों के लिए शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह अप्रैल-दिसंबर 2024 के 60 करोड़ डॉलर से बढ़कर तीन अरब डॉलर हो गया.
हालांकि, एफपीआई ने 4.3 अरब डॉलर का शुद्ध बहिर्वाह दर्ज किया गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में एफपीआई का शुद्ध प्रवाह 9.4 अरब डॉलर रहा था. अप्रैल-दिसंबर, 2025 में विदेशी मुद्रा भंडार में 30.8 अरब डॉलर (भुगतान संतुलन आधार पर) की कमी आई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 13.8 अरब डॉलर की कमी आई थी.
इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि जनवरी, 2026 में अप्रत्याशित रूप से बढ़ा वस्तु व्यापार घाटा चालू खाता चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में चालू खाते के शेष में सुधार को सीमित कर सकता है. इसके अलावा, उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी भी तत्काल अवधि में भारत के आयात बिल पर असर डाल सकती है.


