Ranchi : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के इच्छुक नेट–जेआरएफ उत्तीर्ण विद्यार्थियों को शोध निर्देशक (गाइड) नहीं मिल पा रहा हैं. कई बार विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन के दरवाजे खटखटाए जा चुके है.
कुडुख भाषा विभाग की एक छात्रा ने जून 2024 में नेट–जेआरएफ परीक्षा पास की. वह लोहरदगा की रहने वाली है. उसके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक हैं.
पढ़ाई के लिए वह रांची में 3000 रुपये मासिक किराए पर रह रही है. लेकिन नेट–जेआरएफ पास करने के बाद भी उसे आज तक शोध निर्देशक नहीं मिल पाया है. समय बीतने के साथ उसका डर बढ़ता जा रहा है कि कहीं उसका सपना सिर्फ व्यवस्था की कमी के कारण टूट न जाए.
केस -2 किसान की बेटी की सफलता, लेकिन गाईड का अभाव
नागपुरी विभाग की एक छात्रा (नाम नहीं छापने) की शर्त पर बताई कि नेट पास जनवरी 2024 में की है. कॉलेज पढ़ने 60 किमी दूर बुंडु से आती है. मां-बाप खेती बाड़ी करते है.
साग सब्जी बेचकर, कॉलेज जाने के लिए घर से 100 रूपया मिलता है. इसी से पढ़ाई कर रहे है. लेकिन कॉलेज में स्थायी शिक्षक और गाईड नहीं मिल रहा है.


