नई दिल्ली: वैश्विक एचआर और पेरोल प्लेटफॉर्म ‘डील’ (Deel) द्वारा जारी ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल हायरिंग रिपोर्ट 2025’ ने अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार के बदलते स्वरूप को उजागर किया है. 150 से अधिक देशों के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों के डेटा पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि अब वैश्विक कंपनियां केवल पैसा बचाने के लिए नहीं, बल्कि विशेष हुनर की तलाश में दुनिया भर से नियुक्तियां कर रही हैं.
भारत: दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI ट्रेनिंग हब
रिपोर्ट के अनुसार, भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैलेंट सप्लाई करने के मामले में तीसरे स्थान पर है. भारत में अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों में सालाना 24.1% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है. सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘AI ट्रेनर्स’ की भूमिका में आया है. वर्तमान में दुनिया भर में 70,000 से अधिक लोग पेशेवर रूप से AI सिस्टम को प्रशिक्षित कर रहे हैं.
इस क्षेत्र में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. वैश्विक स्तर पर 58.2% AI ट्रेनर अमेरिका में हैं, जिसके बाद भारत (7.2%) का स्थान है. इसके बाद फिलीपींस (4.6%) और कनाडा (2.1%) का नंबर आता है.
AI नौकरियों में रिकॉर्ड उछाल और वेतन
साल 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ‘AI ट्रेनर’ सबसे तेजी से बढ़ने वाला पद रहा, जिसमें 283% की अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई. ये पद अलग-अलग कौशल और वेतन श्रेणियों में बंटे हुए हैं:
- लगभग 30% ट्रेनर डेटा लेबलिंग जैसे कार्यों के लिए $15-20 (करीब 1,200-1,600 रुपये) प्रति घंटा कमाते हैं.
- 6.1% विशेषज्ञ (जैसे डॉक्टर या अर्थशास्त्री) $100 (करीब 8,400 रुपये) प्रति घंटा से अधिक की फीस लेते हैं.
हालांकि, रिपोर्ट ने एक गंभीर मुद्दे की ओर भी इशारा किया है. अमेरिका जैसे विकसित देशों में भी इस क्षेत्र में लैंगिक वेतन अंतर मौजूद है. जहां पुरुष AI ट्रेनर्स का औसत वेतन $50 प्रति घंटा है, वहीं महिलाओं के लिए यह आंकड़ा केवल $30 है.
ग्लोबल हायरिंग के 4 मुख्य बदलाव
- प्रतिभा को प्राथमिकता: $100 मिलियन से अधिक की फंडिंग वाले स्टार्टअप अब सस्ते श्रम के बजाय ब्रिटेन, कनाडा और जर्मनी जैसे विकसित देशों से विशेषज्ञ नियुक्त कर रहे हैं.
- करेंसी हॉपिंग: आर्थिक रूप से अस्थिर देशों के कर्मचारी अपनी कमाई सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय मुद्रा के बजाय अमेरिकी डॉलर (USD) में भुगतान लेना पसंद कर रहे हैं.
- शहरों की ओर वापसी: महामारी के दौरान दूरदराज के इलाकों में गए कर्मचारी अब वापस न्यूयॉर्क, लंदन और पेरिस जैसे बड़े शहरों की ओर लौट रहे हैं.
- अन्य उभरते क्षेत्र: AI के अलावा लीगल केस मैनेजर्स (164% वृद्धि) और मेडिकल एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट्स (123% वृद्धि) की मांग भी तेजी से बढ़ी है.
डीन की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुका है. आने वाले समय में AI ट्रेनिंग न केवल एक रोजगार का जरिया होगी, बल्कि एक मुख्यधारा के करियर के रूप में स्थापित होगी.


