भारतीय शेयर बाजारों के लिए आज का दिन ‘ब्लैक थर्सडे’ जैसा साबित हुआ. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर दिए गए कड़े बयानों और किसी स्पष्ट शांति रोडमैप की कमी ने वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया. इसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला, जहाँ बाजार खुलते ही निवेशकों के अरबों रुपये डूब गए.
बाजार का हाल: भारी गिरावट के साथ शुरुआत
गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सूचकांक सेंसेक्स 872 अंक की गिरावट के साथ 72,262 पर खुला, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ यह और भी नीचे चला गया. शुरुआती एक घंटे के भीतर ही सेंसेक्स में 1,490 अंकों (2.04%) की भारी गिरावट दर्ज की गई. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 1.31% या 300 अंकों की गिरावट के साथ 22,383 के स्तर पर खुला. बाजार में बढ़ती घबराहट के कारण वोलैटिलिटी इंडेक्स (India VIX) 5% से ज्यादा उछलकर 26.27 के खतरनाक स्तर पर पहुँच गया.
गिरावट के मुख्य कारण
ट्रंप की चेतावनी
राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया संबोधन में पश्चिम एशिया के संघर्ष को समाप्त करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं दी, बल्कि ईरान जैसे देशों को ‘पत्थर युग’ में भेजने की चेतावनी दी. इससे बाजार को लगा कि युद्ध जल्द समाप्त होने के बजाय और भीषण रूप ले सकता है.
कच्चे तेल में उबाल
युद्ध की आशंका बढ़ते ही वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया. ब्रेंट क्रूड ऑयल 5.24% उछलकर 106.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया. भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह बड़ी आर्थिक चुनौती है.
विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को ही 8,331 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी स्थिति साफ कर दी थी, जिससे घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ गया.
सेक्टर और शेयरों का प्रदर्शन
बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली. बैंकिंग, ऑटो, आईटी, रियल्टी और मेटल सेक्टर के सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. निफ्टी के प्रमुख शेयरों में सन फार्मा, इंडिगो, एशियन पेंट्स, श्रीराम फाइनेंस, एक्सिस बैंक और ट्रेंट को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया से शांति के संकेत नहीं मिलते, बाजार इसी तरह ‘इवेंट-ड्रिवन’ बना रहेगा. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की ओर से खरीदारी की कोशिश जारी है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के सामने यह नाकाफी साबित हो रही है. फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है.


