Tuesday, February 17, 2026

झारखंड हाईकोर्ट ने हिरासत में मौत मामले में न्यायिक जांच को लेकर राज्य के गृह सचिव को नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.

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रांची: झारखंड में हिरासत यानी कस्टोडियल डेथ के मामलों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की खंडपीठ ने राज्य के गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर पूछा है कि राज्य में हिरासत में हुई मौतों के मामलों में न्यायिक जांच कराई गई है या नहीं.

NHRC के दिशा निर्देशों का पालन हुआ या नहीं: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने गृह सचिव से यह भी जानना चाहा है कि ऐसे मामलों में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों का पालन हुआ है या नहीं. मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पहले दाखिल किए गए शपथपत्र में यह स्पष्ट नहीं है कि हिरासत में हुई मौतों की न्यायिक जांच हुई है या नहीं.

झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार के अनुसार, कोर्ट ने माना कि गृह सचिव की ओर से दायर शपथपत्र अस्पष्ट है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सादाब अंसारी ने भी अदालत को बताया कि शपथपत्र में जरूरी तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है. इस पर अदालत ने गृह सचिव को निर्देश दिया कि वे नए सिरे से शपथपत्र दाखिल करें और उसमें यह स्पष्ट करें कि हिरासत में हुई मौतों के मामलों में न्यायिक जांच कराई गई है या नहीं.

दरअसल, मो मुमताज अंसारी ने याचिका दायर कर राज्य की जेलों और न्यायिक हिरासत में हुई मौतों की जांच का आदेश देने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि हिरासत में मौत के मामलों में मृत्यु की सूचना मजिस्ट्रेट को दी गई, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस दस्तावेज नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि इन मामलों की विधिवत न्यायिक जांच कराई गई. अदालत ने इस गंभीर मुद्दे पर राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब तलब करते हुए संकेत दिया है कि हिरासत में मौत जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है.

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