Friday, March 27, 2026

झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने दुमका से राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन किया.

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दुमका: झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान आज दुमका पहुंचे. यहां के कन्वेंशन हॉल में उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन किया. साथ ही स्टेट लेवल लीगल सर्विसेज कम एंपावरमेंट कैंप में भी भाग लिया. इस अवसर पर उन्होंने 22575 लाभुकों के बीच 13 करोड़ 86 लाख की परिसंपत्ति का वितरण किया.

राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल उद्घाटन के मौके पर झारखंड उच्च न्यायालय के तीन जस्टिस न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद, न्यायाधीश आनंदा सेन और न्यायाधीश प्रदीप कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद रहे. इसके साथ ही जिले के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा, एसपी पीताम्बर सिंह खेरवार की उपस्थिति रही. साथ ही काफी संख्या में लाभुकों ने भाग लिया. इस मौके पर झारखंड सरकार के कल्याणकारी योजनाओं के स्टालों का भी उन्होंने निरीक्षण किया. वे अपने परिवार के साथ दुमका पहुंचे थे

मानवता को ध्यान में रखकर करें न्याय प्रणाली विकसित

अपने संबोधन में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा कि हमें ऐसी न्याय प्रणाली का निर्माण करना होगा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति केवल एक केस फाइल नहीं बल्कि गरिमा और संवेदनशीलता से युक्त एक मानव के रूप में दिखे. जब हम कमजोर वर्ग के लोगों की बात ध्यान से सुनते हैं तो हमें यह समझ में आता है कि उनकी पीड़ाएं कितनी वास्तविक हैं.

उन्होंने कहा, “घरेलू हिंसा से पीड़ित व्यक्ति केवल कानूनी संरक्षण का ही नहीं चाहता बल्कि वह भावनात्मक सहारा और आर्थिक सुरक्षा भी चाहता है. शोषण से बचाया गया कोई बच्चा केवल पुनर्वास ही नहीं बल्कि शिक्षा और स्नेह भी चाहता है. अधिकारों से वंचित किया गया कोई श्रमिक केवल मुआवजा ही नहीं बल्कि शोषण के विरुद्ध दीर्घकालिक सुरक्षा भी चाहता है.”

Inaugurated of National Lok Adalat

लोगों को संबंधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने कहा, “न्याय केवल कानून के माध्यम से ही प्रदान नहीं किया जाना चाहिए बल्कि संकट में पड़े लोगों का साथ करुणा और भावनापूर्ण तरीके से देना होगा. भविष्य में हमें न्याय प्रणाली को और अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी बनाना होगा. कानूनी सेवाओं में टेक्नोलॉजी को अधिक सशक्त करना होगा ताकि राज्य के दूर-दराज क्षेत्रों तक भी हमारी पहुंच सुनिश्चित हो सके. हमें नीतियों और योजनाओं को बदलती सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढालना होगा.”

लोक अदालतों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण.

मुख्य न्यायाधीश ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि टकराव के स्थान पर संवाद और सुलह को प्राथमिकता देना ही किसी समाज के नैतिक और सामाजिक ताने-बाने को सुदृढ़ करता है. लोक अदालतें इसी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती हैं. वे ऐसा मंच प्रदान करती हैं जहां विवादों को बढ़ाया नहीं जाता, बल्कि करुणा, सम्मान और आपसी समझ के साथ सुलझाया जाता है. वे न केवल लंबित मामलों को कम करती हैं, बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण रूप से मानवीय पीड़ा को कम करती हैं. वे ऐसे समाधान प्रस्तुत करती हैं जो थोपे नहीं जाते, बल्कि पक्षकारों द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार किए जाते हैं. झालसा अब केवल निःशुल्क कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि समग्र सशक्तिकरण की सुविधा प्रदाता बन गई है.

Inaugurated of National Lok Adalat

ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर आधारित शॉर्ट फिल्म की सराहना की

दुमका के कन्वेंशन हॉल में इस मौके पर गर्ल्स ट्रैफिकिंग पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई. जिसमें यह बताया गया कि कैसे चंद पैसों के लालच में कोई व्यक्ति किसी बच्ची के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है. चीफ जस्टिस ने इस फिल्म की काफी सराहना की. उन्होंने कहा कि आज हमें यह लघु फिल्म को देखने का अवसर भी मिला. यह फिल्म अत्यंत विचारोत्तेजक और प्रेरणादायक थी. यह हमें न केवल सामने आने वाली चुनौतियों पर, बल्कि संस्थानों की जिम्मेदारियों पर भी विचार करने के लिए प्रेरित करती है.

उन्होंने कहा, “मैं उन युवा प्रतिभाओं की सराहना करता हूं जिनकी संवेदनशीलता और रचनात्मकता इस फिल्म में स्पष्ट रूप से झलकी. मुझे आशा है कि उनके प्रयास अनेक लोगों को विधिक जागरूकता से सार्थक रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे.”

जिला प्रशासन के प्रयासों की सराहना की

चीफ जस्टिस ने मंच से जिला प्रशासन के प्रयासों की भी तारीफ की. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी से मैं विशेष रूप से उत्साहित हूं. कल्याणकारी योजनाएं चाहे कितनी ही अच्छी तरह क्यों न हों, वे तभी अपने उद्देश्य को प्राप्त करती हैं जब लक्षित लाभार्थी बिना भय, भ्रम या विलंब के उन्हें प्राप्त कर सकें.

न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर किया फोकस

वहीं, हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने झारखंड में हो रही ह्यूमन ट्रैफिकिंग को काफी चिंताजनक बताया. उन्होंने मंच पर उपस्थित जिले के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा के तरफ मुखातिब होकर कहा कि इसे रोकने के साथ जो लड़कियां-महिलाएं इस ट्रैफिकिंग से बचकर आती हैं उन्हें आप रोजगार से जोड़ने की दिशा में पहल करें. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान जो ट्रैफिकिंग पर एक शॉर्ट फिल्म दिखाई गई, उसे देख आंखें नम हो गईं.

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