Saturday, March 28, 2026

झारखंड सीआईडी ने साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले 15,000 बैंक खातों की पहचान की है.

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रांची : इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी आई4सी और झारखंड पुलिस के प्रतिबिंब एप की मदद से साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले 15,000 खातों की जानकारी हासिल की गई है. सभी खातों में ठगी के पैसे साइबर अपराधियों के द्वारा ट्रांसफर किए जाते थे.

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के द्वारा झारखंड पुलिस को 15,000 ऐसे बैंक खातों की जानकारी दी गई है, जिनके जरिए साइबर अपराधी ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं. इन खातों के जरिए न सिर्फ झारखंड के साइबर अपराधी झारखंड के लोगों से ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं, बल्कि विदेशी साइबर अपराधियों के साथ मिलकर भी देशभर में ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं. इंडियन साइबर क्राइम कंडीशन सेंटर के द्वारा मिली खातों की जानकारी के बाद झारखंड सीआईडी की टीम इस पर कार्रवाई भी शुरू कर चुकी है. इस मामले में अब तक केवल झारखंड से ही आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के द्वारा जिन 15,000 बैंक खातों की जानकारी झारखंड सीआईडी को दी गई है. उसकी जांच शुरू कर दी गई है. झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने बताया कि आई4सी देशभर में होने वाले साइबर ठगी से जुड़ी जानकारियां राज्य पुलिस को शेयर करता है.

इसी कड़ी में झारखंड सीआईडी को यह जानकारी दी गई है कि झारखंड में 15,000 ऐसे बैंक खाते हैं जिनके जरिए पूरे देश भर से साइबर ठगी की जा रही है. डीजीपी ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक स्तर पर 40 बैंक खातों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. अब तक इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया गया है, बाकी लोगों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी है, जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे.

झारखंड साइबर अपराधियों के लिए पहले से ही काफी खतरनाक रहा है. देशभर में झारखंड का जामताड़ा मॉड्यूल सबसे खतरनाक माना जाता है. यह पहली बार हुआ है जब झारखंड सीआईडी की टीम को ऐसे 15,000 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की जाती है.

झारखंड सीआईडी का मानना है कि अगर तेज गति से सभी 15,000 खातों पर कार्रवाई की जाए तो साइबर ठगी पर एक हद तक विराम लग सकता है. क्योंकि अब वैसे लोग भी जेल जा रहे हैं जो लोग ठगी के पैसे अपने अकाउंट में कमीशन के लालच में मंगवाते थे. अगर साइबर अपराधियों के इस नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया जाए तो उन्हें साइबर ठगी के लिए सबसे जरूरी चीज बैंक खाते नहीं मिलेंगे.

डीजीपी अनुराग गुप्ता के निर्देश पर डीएसपी नेहा बाला ने एनसीआरपी और समन्वय पोर्टल के एकीकृत उपयोग से झारखंड के उन बैंक खातों (लाभार्थी खातों) का विश्लेषण किया, जिनमें साइबर ठगी की बड़ी राशि प्राप्त हुई थी. इस गहन विश्लेषण से 40 ऐसे बैंक खातों की पहचान हुई, जिनमें एक बार में 10 लाख या उससे अधिक की राशि प्राप्त हुई थी.

इन खातों में बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक, इंडसइंड बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी बैंक, फेडरल बैंक, बंधन बैंक, फिनो पेमेंट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक के खाते शामिल हैं.

पहले चरण में 40 में से सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. बाकी 33 की तलाश की जा रही है. वर्तमान समय में 15,000 बैंक खातों में सीआईडी की साइबर क्राइम ब्रांच की टीम वैसे खातों को पहले चिन्हित कर रही है, जिनमें 10 लाख से ज्यादा की ठगी की राशि भेजी गई है. लेकिन सीआईडी की साइबर क्राइम ब्रांच की टीम उन सभी 15,000 खातों पर कार्रवाई की तैयारी में लग चुकी है, जिनमें साइबर ठगी के पैसे गए हैं.

आपको बता दें कि झारखंड सीआईडी के द्वारा डेवलप किया गया प्रतिबिंब एप भी साइबर अपराधियों के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है. I4c के साथ समन्वय स्थापित कर प्रतिबिंब की टीम लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ काम कर रही है. प्रतिबिंब के माध्यम से न सिर्फ झारखंड में बैठकर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के बारे में जानकारी मिल रही है, बल्कि देशभर में साइबर ठगी करने वाले साइबर अपराधियों के बारे में भी सटीक सूचनाएं मिल रही हैं.

प्रतिबिंब एप के द्वारा साइबर अपराधियों के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबर की मैपिंग की जाती है. मैपिंग के आधार पर उनके मोबाइल सिम और उससे जुड़े खाते को फ्रिज करवाया जाता है. झारखंड सीआईडी साइबर अपराधियों के द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड का डाटाबेस तैयार कर प्रतिबिंब एप पर फीड करती है. साथ ही ठगी के लिए जिन इलाकों का इस्तेमाल सर्वाधिक हो रहा है, उसकी मैपिंग भी की जा रही है. जिसे सीआईडी के प्रतिबिंब पोर्टल पर रजिस्टर किया जाता है. सिम कार्ड और ठगी के लिए जहां से फोन किए जा रहे हैं, उन इलाकों की भी मैपिंग की जा रही है.

प्रतिबिंब एप में उन सारे नंबरों को दर्ज किया जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी में देशभर में कहीं भी किया जा रहा है. साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे इन नंबरों को राज्य के संबंधित जिले के एसपी को भेजा जाता, ताकि उन नंबरों को ब्लॉक कराया जा सके. साथ ही सर्विस प्रोवाइडर्स को भी इसकी जानकारी दी जाती है, ताकि फर्जी तरीके से सिम का इस्तेमाल बंद हो. प्रतिबिंब एप व पोर्टल की सहायता से अब तक केवल झारखंड में ही 1500 से ज्यादा साइबर अपराधी गिरफ्तार हो चुके, जबकि 10 हजार से ज्यादा सिम कार्ड ब्लाक किए जा चुके हैं.

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