रांचीः रमजान (ईद )के पवित्र महीने को लेकर झारखंड पुलिस के स्पेशल ब्रांच ने राज्य के सभी जिलों के एसएसपी/एसपी को पत्र जारी कर सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. स्पेशल ब्रांच के पत्र में रमजान के महीने में सुरक्षा के बिंदु पर भी कई निर्देश जारी किए गए हैं.
क्या लिखा है पत्र में
स्पेशल ब्रांच के पत्र में लिखा गया है कि रमजान का पवित्र महीना 19 फरवरी से शुरू होने की उम्मीद है. (चांद दृष्टिगोचर होने के आधार पर तिथि में परिवर्तन संभव). इस दौरान एक महीने तक मुस्लिम समुदाय के लोगों के द्वारा रमजान के मौके पर एक साथ इफ्तार करते हैं और एक साथ मिलकर तरावीह की नमाज पढ़ते हैं. ऐसे में राज्य के सभी जिलों के प्रमुख मस्जिदों, बाजार में खासकर शुक्रवार के दिन सामूहिक रूप से नमाज पढ़ी जाती है जिसमें भीड़ होने की संभावना रहती है. ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा के मुकम्मल इंतजाम किए जाएं.
साथ ही एक माह के रोजा के बाद उम्मीद के अनुसार 21 मार्च को ईद-उल-फितर ईद पर्व मनाया जाने की सूचना है. हालांकि चांद के दृष्टिगोचर होने के आधार पर तिथि में परिवर्तन भी हो सकता है. ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था के खास इंतजाम किए जाएं. यह पर्व भाईचारे और शांति का पर्व है. पवित्र रमजान महीने के अंतिम जुम्मा 20 मार्च को पड़ रहा है. जिसमें सामूहिक नमाज मस्जिदों और खुले स्थानों पर पढ़ी जाती है. प्रायः इस दौरान यातायात की समस्या उत्पन्न होती है. इसलिए जरूरी है कि इस अवसर पर पूर्व से विवाद ग्रस्त मस्जिदों, ईदगाहों और इमामबाड़ों की विशेष निगरानी की जाए और सतर्कता बरती जाए.
पर्व के अवसर पर काफी भीड़ एकत्रित होती है एवं लोग आपस में खुशी का इजहार करते हैं .इस क्रम में दूसरे संप्रदाय के लोगों के द्वारा टिका- टिप्पणी करने तथा पूर्व दुश्मनी या असामाजिक तत्वों के द्वारा किसी प्रकार की गलत हरकतों के कारण सांप्रदायिक तनाव की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती है. ऐसे में हर बिंदु पर नजर रखना बेहद आवश्यक है.
निम्नलिखित बिंदुओं पर सतर्कता और निगरानी रखना आवश्यक
- मस्जिदों के आसपास पुलिस बल, यातायात पुलिस की प्रतिनियुक्ति की जाए.
- अफवाह फैलाने, आपत्तिजनक पोस्ट करने पर निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो. साथ ही सोशल मीडिया पर निगरानी रखी जाए.
- अवैध शराब और प्रतिबंधित मांस पर रोक लगाई जाए.
- मुस्लिम बहुल क्षेत्र में लगने वाले बाजार-हाट में जवानों की प्रतिनियुक्ति की जाए.
- थाना स्तर पर शांति समिति की बैठक की जाए.
- मुस्लिम संप्रदाय के संघ, संगठनों और अंजुमन के प्रमुखों के साथ थाना स्तर से जिला स्तर तक प्रशासन के सहयोग हेतु बैठक सुनिश्चित हो.


