रांची: राजधानी रांची समेत कई इलाकों में मार्च महीने के अंतिम सप्ताह और अप्रैल महीने के शुरू में मौसम ने करवट ली है. हर दिन किसी न किसी समय और कहीं न कहीं तेज हवा के झोंके, मेघगर्जन और कहीं कहीं ओलावृष्टि के साथ बारिश होती रही है. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के हेड डॉ. रमेश कुमार इसे मौसम की विपरीत स्थिति कहकर परिभाषित करते हैं. डॉ. रमेश कुमार कहते हैं कि यह क्लाइमेट चेंज में हो रहे बदलाव का परिणाम भी हो सकता है.
डीप डिप्रेशन की वजह से मौसम में बदलाव
मौसम के इस विपरीत स्थिति को लेकर डॉ. रमेश कुमार बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी से आने वाले डीप डिप्रेशन की वजह से मौसम में यह बदलाव देखा जा रहा है, पहले मार्च या अप्रैल महीने में यह डिप्रेशन एक-दो बार आता था लेकिन इस बार लगातार डीप डिप्रेशन बंगाल की खाड़ी से आ रहा है.
फसल को नुकसान: डॉ. रमेश कुमार
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के हेड डॉ. रमेश कुमार ने कहा कि मार्च के अंत और अप्रैल में प्रारंभ में रांची और आसपास के इलाके में हुई बेमौसम की बारिश रबी फसल और सब्जियों के साथ-साथ आम और लीची के लिए नुकसानदेह साबित हुआ है, लेकिन अच्छी बात यह है कि अभी जो आंधी-बारिश या ओलावृष्टि हुई है, वह एक सीमित क्षेत्र में हुई है, ऐसे में बड़े भाग में अभी भी फसलों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है.
मौसम अपडेट पर नजर रखें किसान: डॉ. रमेश कुमार
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विभाग के प्रमुख डॉ. रमेश कुमार राज्य के किसानों को सलाह देते हैं कि वह अपने तैयार फसल को खेतों में न छोड़ें, उसे जितनी जल्दी हो और मौसम साफ रहे तो घर लाकर सुरक्षित जगह पर रखें. मौसम केंद्र की ओर से समय समय पर संचार के विभिन्न माध्यमों से दी जाने वाली जानकारी पर नजर बनाए रखें.


