झारखंड में छात्रवृत्ति राशि के वितरण को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। जहां विपक्ष केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है, वहीं सत्ताधारी दल राज्य सरकार की ओर उंगली उठा रहा है। छात्रों को समय पर छात्रवृत्ति न मिलने से उनमें निराशा है।
रांची। एससी, एसटी तथा ओबीसी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति की राशि केंद्र से नहीं मिलने के लिए केंद्र और राज्य सरकार पर ठीकरा फोड़े जाने का सिलसिला जारी है। राज्य सरकार इसके लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है तो विपक्ष राज्य सरकार को।
इस बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के आरोप को गलत बताते हुए कहा कि केंद्र से इसलिए राशि नहीं मिल रही है, क्योंकि राज्य सरकार ने गाइडलाइन बदल दी है। गुरुवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सूचना के माध्यम से कहा कि उन्होंने पता करने की कोशिश की कि केंद्र से छात्रवृत्ति की राशि क्यों नहीं मिल रही है।
पता चला कि झारखंड सरकार केंद्र की गाइडलाइन का अनुपालन नहीं कर वर्ष 2022 में अपनी गाइडलाइन बना दी। उलटे सरकार सदन को दिग्भ्रमित कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पहले अपनी गड़बड़ी सुधारे। अपने पदाधिकारियों को दिल्ली ले जाकर केंद्र के समक्ष गड़बड़ी सुधारे जाने की बात रखे।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की गड़बड़ी के कारण बच्चे सफर कर रहे हैं। हालांकि उनके आरोपों पर सदन में सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया। बताते चलें कि इससे पहले कल्याण मंत्री चमरा लिंडा तथा मंत्री सुदिव्य कुमार छात्रवृत्ति के लिए केंद्रांश की राशि नहीं मिलने के आरोप लगाए थे।
उनका कहना था कि केंद्रांश की राशि मिले बिना राज्यांश की राशि जारी नहीं की जा सकती। मंत्रियों ने इसे लेकर शीघ्र ही केंद्रीय मंत्री से मिलने की बात भी कही है।
इधर, बाबूलाल ने गुमला में धान खरीद में गड़बड़ी का मामला उठाते हुए कहा कि डीसी द्वारा जांच कराने तथा रिपोर्ट मिलने के बाद भी दोषी कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर आपरेटर सोनू कुमार वर्मा इस गड़बड़ी में संलिप्त है।


