झारखंड में इस साल मनरेगा का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. 30 नवंबर 2025 तक जारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 818.03 लाख मानव-दिवस का काम पूरा हो चुका है. यह 1200 लाख मानव-दिवस के लक्ष्य को देखते हुए बहुत अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है. इससे ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है.
महिलाओं की भागीदारी: 51.71%
ST श्रमिकों की हिस्सेदारी: 23.40%
SC श्रमिकों की भागीदारी: 8.98%
दिव्यांग श्रमिकों को रोजगार: 6,576
- इस साल 19.99 लाख परिवारों को मनरेगा से काम मिला और 22.75 लाख श्रमिक अलग-अलग कार्यों में जुड़े.
- सबसे खास बात यह है कि 48,808 परिवारों ने 100 दिन का पूरा रोजगार हासिल किया, जिससे उनकी जीविका और मजबूत हुई.
कौन से जिले आगे रहे?
काम और रोजगार सृजन में आगे: रांची, गुमला, दुमका, लोहरदगा, हजारीबाग
महिला सहभागिता में अव्वल: पश्चिम सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, सिमडेगा (यहां महिला भागीदारी 55% से ज्यादा)
ST श्रमिकों की सबसे ज्यादा भागीदारी: सिमडेगा, खूंटी, पश्चिम सिंहभूम
राज्यभर में काम की स्थिति
स्वीकृत कार्य: 14.78 लाख
प्रगति पर कार्य: 12.05 लाख
पूर्ण कार्य: 2.73 लाख
किस-किस प्रकार के काम पर खर्च हुआ पैसा?
कुल खर्च का 65.22% कृषि और किसान हित से जुड़े कामों पर किया गया है, जैसे—
खेत-खाला
तालाब गहरीकरण
मेड़बंदी
सोख्ता निर्माण
मिट्टी व जल संरक्षण कार्य
भुगतान व्यवस्था में भी सुधार
इस साल मनरेगा भुगतान प्रणाली भी काफी बेहतर रही. लगभग सभी भुगतान 15 दिनों के अंदर किए गए, जिससे श्रमिकों का भरोसा और बढ़ा है.


