दिशोम गुरु’ के नाम से मशहूर झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को केंद्र सरकार ने मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने का फैसला लिया है. गणतंत्र दिवस 2026 यानी 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है.
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित करने की घोषणा की गई. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2026 के लिए 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की, जिनमें पांच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री शामिल हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पब्लिक अफेयर्स के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के पूर्व अध्यक्ष शिबू सोरेन को पद्म भूषण देने को ऐलान किया गया.शिबू सोरेन का पिछले वर्ष अगस्त महीने में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. इनके बेटे हेमंत सोरेन वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री हैं. झारखंड में वर्तमान में शिबू सोरेन की बनाई पार्टी जेएमएम गठबंधन की सरकार है. शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे हैं. शिबू सोरेन का कद केवल राज्य की राजनीति तक सीमित नहीं रहा. तीन बार मुख्यमंत्री होने के साथ ही वे मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय कोयला मंत्री रहे. शिबू सोरेन आदिवासियों के बड़े नेता माने जाते थे. दिशोम गुरु के नाम से विख्यात शिबू सोरेन का जन्म 11 फरवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा गांव में हुआ था. 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के अस्पताल में उनका निधन हुआ.शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि आदिवासी समाज के हक और सम्मान के प्रतीक भी थे. उनकी पहचान शोषण, विस्थापन और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करने वाले की रही. उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक आदिवासी मुद्दों को मजबूती से उठाया. उन्होंने सत्ता सुख के लिए नहीं बल्कि एक व्यक्तिगत और सामाजिक त्रासदी के बाद राजनीतिक सफर और संघर्ष शुरू किया. उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या महाजनों (सूदखोरों) ने कर दी थी. उस दौर में महाजनी प्रथा और सूदखोरों का इतना आतंक था कि आदिवासियों की जमीनें कौड़ियों के भाव हड़प ली जाती थी. पिता की हत्या ने शिबू सोरेन को भीतर तक हिला दिया. इसके बाद उन्होंने महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन किया. उन्होंने आदिवासी समाज के बीच शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समाज से नशे को उखाड़ फेंकने के लिए काम किया. उन्होंने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और अलग राज्य की मांग को लेकर लंबे सालों तक संघर्ष किया. झारखंड के गठन में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है. उन्होंने आदिवासी समाज को पहचान और आवाज दी. यही वजह है कि लोग उन्हें दिशोम गुरु कहते हैं.आपको बता दें कि जब तक शिबू सोरेन रहे झारखंड के सत्ता की चाबी उनके इर्द-गिर्द घूमती रही. आज उनके बेटे हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री हैं. झारखंड विधानसभा ने उनकी सेवाओं को देखते हुए पहले ही उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने की अनुशंसा की थी. झारखंड विधानसभा केंद्र सरकार को शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से भेज चुकी है.


