झारखंड मुक्ति मोर्चा आज धनबाद में अपना 54वां स्थापना दिवस मना रहा है। इस खास मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष भी हैं, समारोह में भाग लेने के लिए धनबाद पहुंचे हैं। धनबाद हवाईपट्टी पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। यह आयोजन रणधीर वर्मा स्टेडियम (गोल्फ ग्राउंड) में हो रहा है, जहां 4 फरवरी, 1973 को झामुमो की स्थापना हुई थी
धनबाद। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो-JMM) अपने जन्मकाल से ही मूलवासियों और आदिवासियों की पार्टी मानी जाती रही है। झामुमो के नेता बाहर से आकर बसे लोगों-जैसे बिहारी, साहूकार, जमींदार और व्यापारियों-को ‘दिकू’ (शोषक) कहकर संबोधित करते रहे हैं।
अब जब झामुमो पिछले सात वर्षों से झारखंड की सत्ता में है और सत्ताधारी पार्टी बन चुकी है, तो वह सभी को साथ लेकर चलने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। इसका स्पष्ट संदेश झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिया है।
सोरेन ने कहा कि मूलवासियों के साथ-साथ जो लोग बाहर से आकर यहां बसे हैं, वे भी स्वयं को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं। सोरेन ने कहा, जन्म देने वाली मां से पालन करने वाली मां का दर्जा बड़ा होता है। मुख्यमंत्री बुधवार को धनबाद में झामुमो के 54वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। गौरतलब है कि 4 फरवरी 1973 को धनबाद में ही झामुमो की स्थापना हुई थी।
लंदन में लोग बोल रहे जोहार
उन्होंने कहा, जोहार (संथाली में नमस्कार) सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, पूरे देश में इस अभिवादन को सम्मान और समर्थन मिला है। लंदन में भी लोग ‘जोहार’ बोल रहे हैं। हम अपने कार्यकर्ताओं के लिए हर मौसम, हर चुनौती और हर परिस्थिति में तैयार हैं।
सोरेन ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों ने लंबी लड़ाई लड़ी। कई ऐसे नेता थे जिन्होंने रास्ता दिखाया, लेकिन वे आज हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि उनकी पहचान देश और दुनिया में आदिवासी, दलित और मजदूरों के नेता के रूप में रही है।
सपनों को पूरा करने का संकल्प दिवस
उन्होंने कहा, यह सिर्फ स्थापना दिवस नहीं है, बल्कि गुरुजी के नहीं रहने का दिन भी है। यह राज्य को सजाने-संवारने और उनके सपनों को पूरा करने का संकल्प दिवस है। मालूम हो कि झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं। पिछले साल 4 अगस्त, 2025 को उनका निधन हो गया था।
गोल्फ ग्राउंड के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि इस धरती ने कई ऐसे नेतृत्व दिए, जिन्होंने दमनकारियों के सामने सीना तानकर बलिदान दिया। भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, बिनोद बिहारी महतो और ए.के. राय जैसे महान नेताओं का यह राज्य है। इनके बलिदान और समर्पण ने झारखंड को अलग पहचान दी है।
उन्होंने दोहराया कि बाहर से आकर बसे लोग भी खुद को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं। झारखंड ने पूरे देश को चलाने का काम किया, लेकिन यहां के लोगों को गरीबी, उत्पीड़न और अशिक्षा मिली। इसी कारण गुरुजी ने अलग राज्य का बिगुल फूंका, उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब अलग झारखंड राज्य का आंदोलन शुरू हुआ, तब कई लोग इस मिट्टी में मिल गए। राज्य गठन के बाद तंज कसा गया कि-ये भोले लोग राज्य नहीं चला सकते। उन्होंने कहा-राज्य गठन के 15–16 साल बाद भाजपा से सत्ता छीनने का काम झामुमो ने किया।
आज झारखंड के युवा दूसरे राज्यों से आगे रह सकते थे, लेकिन राज्य को बीमारू बना दिया गया। यहां का खून चूसा गया, स्कूल बंद किए गए और गरीबों को मजबूत नहीं होने दिया गया। सामंती सोच वाले लोग यही करते रहे, उन्होंने कहा।
सोरेन ने कहा कि ‘अबुआ सरकार’ बनने के बाद स्कूल दोबारा खोले गए और निजी शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है। आज झारखंड के बच्चे विदेशों में पढ़ाई करने जा रहे हैं। हालांकि कुपोषण जैसी समस्याओं से बाहर निकलने में अभी समय लगेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार रांची से नहीं, बल्कि गांवों से संचालित होती है। अधिकारी गांव-गांव जाकर काम कर रहे हैं। गरीबी के आधार पर परिवारों को चिन्हित कर 2500 रुपये की सहायता दी जा रही है। माताओं-बहनों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं और उन्हें आईएएस-आईपीएस जैसे बड़े पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित करें।
धनबाद के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से बाहरी लोगों को लाया जा रहा है। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि वे रोजगार के अवसरों पर अपना हक सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नौकरी देने का कानून बनाया है।
गांव भी हमारा, शहर भा हमारा-कोई कोना नहीं छोड़ना है
सोरेन ने कहा कि गुरुजी (शिबू सोरेन) के नहीं रहने की कमी महसूस होती है और आगे का सफर आसान नहीं है। लेकिन उनकी दी हुई शिक्षा से मंजिल जरूर मिलेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि बड़ी मुश्किल से राज्य और सत्ता मिली है, इसलिए झारखंड विरोधी ताकतों को दोबारा मौका नहीं देना है। “गांव भी हमारा, शहर भी हमारा-कोई कोना नहीं छोड़ना है। राजनीतिक ताकत को मजबूत करना है। निकाय चुनाव और आने वाले पंचायत चुनाव में विरोधियों को हावी नहीं होने देना है, उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 हजार युवाओं को नौकरी दी गई है। बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकारी नौकरी पर निर्भर न रहें, बल्कि ऐसी शिक्षा लें कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल हो सकें। रांची में कोचिंग की पढ़ाई शुरू की गई है, जिसे सभी जिलों तक विस्तार देने की योजना है।
अग्निवीर की मृत्यु होने पर आश्रित को नौकरी देगी झारखंड सरकार
उन्होंने कहा कि पहले देश के सुरक्षाबलों में सबसे अधिक भर्ती झारखंड से होती थी, लेकिन अब अग्निवीर जैसी योजना लाई गई है। उन्होंने घोषणा की कि अग्निवीर योजना के तहत शामिल किसी जवान की मृत्यु होने पर झारखंड सरकार उसके परिवार को नौकरी देगी। अंत में उन्होंने कहा कि देश में महंगाई काफी बढ़ गई है और इससे आम लोगों को परेशानी हो रही है।


