Sunday, March 22, 2026

झारखंड कुशवाहा महासभा के बैनर तले कुशवाहा समाज के लोगों ने रांची में धरना-प्रदर्शन किया है.

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रांची: झारखंड में पिछड़े समुदाय के लोगों के लिए सरकारी नौकरियां,शैक्षणिक संस्थानों में 27% आरक्षण, कृषि को उद्योग का दर्जा देने सहित सात सूत्री मांगों के समर्थन में आज झारखंड कुशवाहा महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में कुशवाहा समाज के लोगों ने लोकभवन (पूर्व में राजभवन) के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया.

इस धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व कुशवाहा महासभा के अध्यक्ष हाकिम प्रसाद महतो ने किया.उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद साजिश रचकर पिछड़ों का आरक्षण 27% से घटाकर 14% कर दिया गया. राज्य गठन के बाद ओबीसी की हकमारी और मनमानी शुरू हो गया है. अब राज्य के ओबीसी में जागरुकता आयी है और राज्य का कुशवाहा समाज इस आंदोलन का नेतृत्व करेगा. सड़क से लेकर सदन तक हक की लड़ाई लड़ी जाएगी. लोकभवन के समक्ष आज के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं

हजारीबाग से सीपीआई के सांसद रहे भुनेश्वर प्रसाद मेहता भी आज झारखंड कुशवाहा महासभा के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए. इस दौरान पूर्व सांसद ने कहा कि राज्य में आदिवासियों का आरक्षण बढ़ाया गया. उससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन राज्य बनने के बाद ही झारखंड में ओबीसी का आरक्षण 27% से घटाकर 14% कर देना सही नहीं था. भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के साथ-साथ राज्य में रघुवर सरकार के समय में बनाई गई लैंड बैंक को समाप्त करने, कृषि को उद्योग का दर्जा देने, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को अक्षरशः लागू करने जैसी मांगें अगर पूरी नहीं की गई तो आनेवाले दिनों में रांची के मोरहाबादी मैदान में विशाल महारैली की जाएगी.

Kushwaha Protest In Ranchi
  • झारखंड में पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की सीमा 14% से बढ़ाकर 27% की जाए. साथ ही राज्य के जिन जिलों में आरक्षण आंशिक रूप से लागू है या शून्य है वहां भी समान रूप से 27% आरक्षण लागू किया जाए.
  • कृषि को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाए, ताकि कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल सके और कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार हो. इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और कृषि उत्पादों में मूल्य वर्धन के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी.
  • भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को राज्य में पूर्ण रूप से लागू किया जाए और उपजाऊ जमीन को अधिग्रहण से मुक्त रखा जाए.
  • विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और मुआवजा हेतु पृथक नीति बनाई जाए और एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए.
  • उद्योगों की स्थापना हेतु जिन भूमिधारकों की भूमि अर्जित की गई है अथवा भविष्य में की जाएगी उन सभी प्रतिष्ठानों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भूमिदाता विस्थापितों के लिए आरक्षित की जाए.
  • उद्योगों के लिए सरकार द्वारा रैयतों से भूमि अधिग्रहित कर उद्योगपतियों को लीज पर दी जाती है. जिससे रैयत भूमिहीन हो जाते हैं.अतः भूमि सीधे लीज पर रैयतों से ही अर्जित की जाए, लीज राशि रैयतों को उपलब्ध कराई जाए और लीज समाप्ति के उपरांत भूमि पुनः रैयतों को वापस की जाए.
  • हजारीबाग जिला अंतर्गत ईचाक और कोहरमा के डोमचांच प्रखंड क्षेत्र को भारत सरकार द्वारा इको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है. जिसके कारण सैकड़ों गांव प्रभावित हो रहे हैं. अतः इसे समाप्त किया जाए अथवा इसकी सीमा क्षेत्र को कम किया जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार और विकास के अवसर सृजित हो सके.
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