रांचीः झारखंड विधानसभा के चौथे दिन प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक शत्रुघ्न महतो ने अबुआ आवास का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि गरीब लोगों ने अपनी झुग्गी-झोपड़ी तोड़कर अबुआ आवास का निर्माण तो शुरू कर दिया, लेकिन भुगतान नहीं होने से निर्माण अधूरा है. लोग सड़कों पर रहने को विवश हैं. लिहाजा, सरकार को बताना चाहिए कि मामला कहां लटका हुआ है. आगे की किस्त क्यों नहीं जारी की जा रही है. जवाब में ग्रामीण विकास विभाग की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अबुआ आवास की स्थिति से जुड़ा ब्योरा साझा किया.
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में अबुआ आवास योजना के तहत 6 लाख 50 हजार आवास निर्माण का लक्ष्य रखा गया था. इसके विरुद्ध कुल 6 लाख 33 हजार 94 आवास योजनाओं को स्वीकृति दी गई. अब तक 4 लाख 92 हजार 464 लाभुकों को प्रथम किस्त की राशि 4 लाख 14 हजार 444 को द्वितीय किस्त की राशि और 2 लाख 46 हजार 358 लाभुकों को तृतीय किस्त की राशि निर्गत की गई है. अब तक कुल 1 लाख 64 हजार 154 आवास का निर्माण पूर्ण हो गया है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 3 हजार करोड़ का उपबंध किया गया है. इसके एवज में अब तक 1200 करोड़ रुपये जिलों को उपलब्ध करा दिया गया है. अगर सदस्य के पास कोई जानकारी है कि किसी को राशि नहीं मिल रही है तो इसकी जांच करा ली जाएगी. इस वर्ष प्रथम किस्त सिर्फ 1,281 लोगों को दी गई है. द्वितीय किस्त 1,80,919 आवास के लिए जारी हुई है. तृतीय किस्त 1,27,290 आवास के लिए दी गई है. करीब 37 हजार लाभुकों को चौथी किस्त की राशि दे दी गई है. जैसे-जैसे निर्माण कार्य पूरा हो रहा है, उसी आधार पर राशि निर्गत की जा रही है. राज्य सरकार भी जरुरतमंदों को आवास देना चाहती है. इस दिशा में काम चल रहा है.
इसपर भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने पूछा कि क्या 2025-26 में अबुआ आवास का आवंटन बंद हो गया है. इस नौ माह में कितने लोगों को अबुआ मिला है. उन्होंने कहा कि बहुत से लाभुकों को पहली किश्त मिल गई है, लेकिन बहुत से लोगों को दूसरी किस्त नहीं मिली है. जवाब में मंत्री ने कहा कि ये लोग भी अब अबुआ आवास की मांग कर रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास देना बंद कर दिया गया था. इससे सभी अवगत हैं. पिछले एक साल के प्रयास से प्रधानमंत्री आवास देने का काम चुनाव बाद शुरु हुआ है. अब प्रधानमंत्री आवास कोई लेना नहीं चाहता है. हमलोगों ने केंद्रीय मंत्री से मांग रखी है कि जिस तरह झारखंड में अबुआ आवास के लिए 2 लाख रुपये दिए जा रहे हैं उसी तरह प्रधानमंत्री आवास के लिए भी 2 लाख रुपये प्रति आवास दिए जाएं. इससे बड़ी परेशानी खत्म हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि अबुआ आवास के लिए झारखंड में 24 लाख आवेदन आए हैं. यह सुझाव भाजपा शासित राज्यों के मंत्री भी दे रहे हैं. क्योंकि महंगाई के दौर में 1 लाख 20 हजार से आवास निर्माण पूरा कराना संभव नहीं है. इसके लिए विपक्ष को भी सहयोग करना चाहिए. सरकार किसी योजना को चलाती है तो एकतरफा नहीं चल सकता है. लाभुक को मकान बनाना पड़ेगा.


