गोवा: ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. दक्षिण गोवा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ग्राहक की शिकायत पर कड़ा रुख अपनाते हुए अग्रवाल के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. यह आदेश कंपनी की कथित लापरवाही और अदालती समन की अनदेखी के बाद आया है.
क्या है मुख्य विवाद?
पूरा मामला प्रीतिश चंद्रकांत घाड़ी नामक एक ग्राहक की शिकायत से जुड़ा है. प्रीतिश ने ओला इलेक्ट्रिक से ₹1.47 लाख की ओला S1 प्रो बाइक खरीदी थी. वाहन की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद, कुछ समय बाद ही बाइक में तकनीकी खराबी आ गई. जब प्रीतिश ने मरम्मत के लिए बाइक सर्विस सेंटर को सौंपी, तो वह महीनों तक वापस नहीं मिली. हैरानी की बात यह रही कि कंपनी यह बताने में भी असमर्थ रही कि ग्राहक की बाइक वर्तमान में किस स्थिति में और कहां है.
उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी
आयोग ने 4 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान ओला इलेक्ट्रिक के व्यवहार को “अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना और उदासीन” करार दिया. आयोग ने पाया कि कंपनी ने ग्राहक से पूरी राशि वसूलने के बाद उसे अधर में छोड़ दिया. भाविश अग्रवाल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी किया गया था ताकि वह स्थिति स्पष्ट कर सकें, लेकिन उनके उपस्थित न होने पर आयोग ने कड़ा कदम उठाया.
बेंगलुरु पुलिस को आदेश
आयोग ने अब बेंगलुरु पुलिस को निर्देश दिया है कि वे भाविश अग्रवाल के खिलाफ वारंट की तामील करें. चूंकि यह एक जमानती वारंट है, इसलिए अग्रवाल ₹1,47,499 (स्कूटर की कीमत के बराबर) का मुचलका भरकर राहत पा सकते हैं. हालांकि, उन्हें 23 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अंतिम दलीलें पेश करनी होंगी.
मुश्किलों का बढ़ता घेरा
यह पहली बार नहीं है जब भाविश अग्रवाल कानूनी पचड़े में फंसे हों. हाल ही में बेंगलुरु में उन पर एक कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला भी दर्ज हुआ है. इसके अलावा, सोशल मीडिया पर ओला की सर्विस क्वालिटी को लेकर ग्राहकों का गुस्सा अक्सर फूटता रहता है.


