Wednesday, March 18, 2026

खरमास 2026: 14 मार्च से सूर्य के मीन राशि में प्रवेश के कारण शादी-मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर एक महीने का विराम लग जाएगा.

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हिंदू धर्म में सूर्य के राशि परिवर्तन का विशेष महत्व होता है. साल 2026 में 14 मार्च, शनिवार से ‘खरमास’ की शुरुआत होने जा रही है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब सूर्य देव मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस अवधि को खरमास या मीन संक्रांति कहा जाता है. इस एक महीने की अवधि में सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लग जाती है.

सूर्य का मीन राशि में प्रवेश और खरमास का समय
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार, चैत्र कृष्ण एकादशी यानी 14 मार्च 2026 को तड़के 03:07 बजे सूर्य कुंभ राशि का त्याग कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे. सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही खरमास का समापन 14 अप्रैल, मंगलवार को सुबह 11:25 बजे होगा, जब सूर्य मेष राशि (मेष संक्रांति) में प्रवेश करेंगे.

खरमास में क्यों वर्जित हैं मांगलिक कार्य?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए सूर्य, गुरु और शुक्र का मजबूत होना अनिवार्य है. खरमास के दौरान सूर्य अपने गुरु बृहस्पति की राशि (धनु या मीन) में होते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सूर्य का प्रभाव और तेज कम हो जाता है, जिससे इस अवधि में किए गए कार्यों के शुभ फल प्राप्त नहीं होते. विशेषकर विवाह के लिए ‘गुरु बल’ और ‘शुक्र बल’ का होना आवश्यक है, जो खरमास में क्षीण माना जाता है.

आध्यात्मिक महत्व: दान और विष्णु भक्ति का महीना
भले ही खरमास में भौतिक सुखों से जुड़े कार्य वर्जित हों, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह महीना अत्यंत फलदायी है. इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, श्रीहरि कीर्तन और सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष लाभकारी माना गया है. पंडितों का मानना है कि इस माह में दान-पुण्य, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. जो जातक इस दौरान संयम और नियम से रहते हैं, उन्हें मृत्यु के पश्चात वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.

मई और जून में ‘मलमास’ का प्रभाव
साल 2026 की एक खास बात यह है कि इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो बार आएगा. 2 मई से 29 जून तक ज्येष्ठ का महीना रहेगा. इसी बीच 15 मई से 17 जून तक ‘मलमास’ (अधिक मास) का प्रभाव रहेगा. इस कारण अप्रैल में खरमास खत्म होने के बाद कुछ समय के लिए शहनाइयां गूंजेंगी, लेकिन मलमास शुरू होते ही फिर से मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा. इसके पश्चात 25 जुलाई से 20 नवंबर तक ‘चातुर्मास’ रहेगा, जिसमें भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं.

विवाह के लिए शुभ मुहूर्त (अप्रैल से जुलाई 2026)
खरमास समाप्त होने के बाद विवाह के लिए कई शुभ तिथियां उपलब्ध होंगी. पंचांग के अनुसार.

बनारसी पंचांग के अनुसार: अप्रैल में 15, 16, 20, 21 और 25 से 30 तारीख तक शुभ मुहूर्त हैं. मई में 1 से 8 और 12 से 14 मई तक विवाह के योग हैं. जून में 19 से 29 तारीख और जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 और 12 तारीख शुभ है.

मिथिला पंचांग के अनुसार: अप्रैल में 17, 20, 26, 30 और मई में 1, 6, 8, 10, 13 तारीख को विवाह संपन्न किए जा सकेंगे.

यदि आप भी घर में किसी मांगलिक कार्य की योजना बना रहे हैं, तो 14 मार्च से पहले या फिर 14 अप्रैल के बाद के शुभ मुहूर्तों का चयन करना श्रेयस्कर होगा. खरमास के दौरान केवल ईश्वर भक्ति और दान-धर्म पर ध्यान केंद्रित करें.

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