कोडरमा में तरवन गांव के लोगों ने एक परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है. उनपर हत्या का आरोप है.
कोडरमा: जयनगर थाना क्षेत्र के तरवन गांव के ग्रामीणों द्वारा एक अनोखा फैसला सुनाया गया है. एक नाबालिग व उसकी मां की हत्या के आरोपियों को न्यायालय द्वारा बेल मिलने से ग्रामीणों ने आरोपियों व उसके पूरे परिवार का सामाजिक रूप से बहिष्कार कर दिया है. गांव के मुखिया राजकुमार यादव ने बताया कि 27 अगस्त 2024 को उनके गांव के रहने वाले दिलीप यादव, उसकी पत्नी जसवा देवी व उसके छोटे पुत्र द्वारा उनकी मंझली बहु सुमन देवी व उनके 4 वर्षीय पुत्र को मारकर कुएं में फेंक दिया गया था. मामले को लेकर मृतका के पिता टीपन महतो ने जयनगर थाने में हत्या का मामला दर्ज करवाया था.
पुलिस ने कांड को अंजाम देने वाले तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा दिया था. वहीं मामले को करीब 6 महीने बीत जाने के बाद उक्त तीनों आरोपियों को जमानत मिल गयी.
इधर ग्रामीणों को जब इसकी सूचना मिली तो ग्रामीणों ने इसे लेकर एक पंचायत बुलाई और बैठक में निर्णय लिया गया कि आरोपी दिलीप यादव, राजेश यादव व जसवा देवी को कोर्ट ने भले ही जमानत दे दी हो लेकिन गांव के लोग उसे सजा जरूर देंगे. जिसके बाद ग्रामीणों ने उक्त तीनों का सामाजिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया.
बता दें कि दिलीप यादव के तीन पुत्र थे और उसके पहले बेटे की बीमारी से मौत हुई थी. मंझले बेटे उपेंद्र यादव की 2015 में सुमन देवी से शादी हुई और उससे 2 बेटे व एक बेटी हुई. 2021 में उपेंद्र की संदेहास्पद रूप से आग लगने से मौत की बात सामने आई.
मंझले बेटे की मौत के बाद दिलीप यादव, उसका छोटा बेटा व उसकी पत्नी, तीनों लगातार उपेंद्र यादव की पत्नी सुमन देवी को आए दिन प्रताड़ित करने लगे. ग्रामीणों के अनुसार सारा विवाद संपत्ति से जुड़ा है. उपेंद्र की मौत के बाद दिलीप यादव व उसकी पत्नी नहीं चाहते थे कि उनकी संपत्ति का हिस्सा सुमन देवी व उसके बच्चे को मिले.
बताते चलें कि दिलीप यादव, राजेश यादव व उसकी मां जसवा देवी उपेंद्र की मौत के बाद से ही उसकी पत्नी सुमन देवी को प्रताड़ित करते रहते थे. गांव के मुखिया के अनुसार 27 अगस्त 2024 को दोपहर में राजेश ने अपने भतीजे (उपेंद्र यादव व सुमन देवी के छोटे पुत्र) को घरेलू विवाद में घर के बाहर सड़क पर पटक दिया था जिससे उसकी मौत हो गई थी.
इसके बाद राजेश ने ही आसपास के लोगों को बताया था कि उसकी भाभी सुमन देवी व उसका छोटे पुत्र दोनों के शव, घर से दूर एक कुएं में गिरे पड़े हैं. इधर घटना को अंजाम देने के बाद उसने गुपचुप तरीके से दोनों का अंतिम संस्कार करना चाहा और आसपास के लोगों से सहयोग करने की अपील की. मगर लोगों ने इसका विरोध किया और मामले की सूचना पुलिस को दे दी.
गांव के मुखिया राजकुमार यादव ने कहा कि एक महिला और उसके नवजात बच्चे की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई. इस मामले में घर-गांव के लोगों ने जो बयान दिया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी दिलीप यादव और उसके बेटे राजेश यादव और उसकी पत्नी द्वारा इस महिला को प्रताड़ित किया गया था, मारपीट की गई थी. बच्चे के साथ भी मारपीट की गई थी. दिनभर महिला व बच्चे नजर नहीं आए.
सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले में संलिप्त तीनों लोगों को गिरफ्तार कर लिया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं मृतका के बड़े बेटे व बेटी को उनके नाना नानी के घर परवरिश के लिए भेज दिया गया.
ग्रामीणों द्वारा यह निर्णय लिया गया कि गांव में होने वाले किसी भी उत्सव, शादी-विवाह या अन्य कार्यक्रमों, सामाजिक कार्यों में दिलीप यादव, उनकी पत्नी जसवा देवी व उसके बेटे राजेश को शामिल नहीं होने दिया जाएगा और न ही उनके घर में होने वाले आयोजनों में गांव का कोई भी व्यक्ति शामिल होगा. इधर ग्रामीणों द्वारा सामाजिक बहिष्कार के फैसले के बाद से दिलीप यादव के घर पर ताला लटका हुआ है और उसका पूरा परिवार गांव से लापता है.
इससे पहले हमलोगों ने भी पंचायत करके मामले को सुलझा दिया था मगर आए दिन लोग महिला व उसके बच्चे को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते रहते थे. घर-गांव व समाज के लोग यदि उन लोगों के सामने जब यह बात रखते थे तो वे लोग अभद्रता करते थे और जब बेल मिल गई तो गांव वालों ने कहा कि यदि ऐसे लोग गांव में रहेंगे, आस-पास रहेंगे तो समाज के लोगों पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा.
शाम को आरोपी राजेश यादव ने बताया कि कुंआ में लाश पड़ी हुई है. इन सारे बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए गांव वालों के गहन मंथन चिंतन के बाद यह निष्कर्ष निकला कि इसके द्वारा घटना को अंजाम दिया गया है. क्योंकि पूर्व में भी इनके द्वारा महिला व उसके बच्चे को प्रताड़ित किया जाता रहा था.
इसलिए गाव के लोगों ने यह निर्णय लिया कि इस परिवार से किसी भी प्रकार का मेलजोल नहीं रखा जाएगा और इन लोगों का बहिष्कार किया जाएगा. समाज के किसी भी कार्यक्रम में उनको नहीं बुलाना है और न ही इनके किसी कार्यक्रम में जाना है. कोई बातचीत भी नहीं रखना है.