हरियाणा के पंचकूला में एक बड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है, जहां कोटक महिंद्रा बैंक की सेक्टर-11 शाखा में पंचकूला नगर निगम के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में करीब ₹150 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी पाई गई है. यह मामला तब उजागर हुआ जब नगर निगम ने अपनी एक मैच्योर हो चुकी एफडी की राशि वापस मांगी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड्स में पैसा ही नहीं मिला.
कैसे हुआ करोड़ों का फर्जीवाड़ा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में तब खुला जब पंचकूला नगर निगम (MC) ने ₹58 करोड़ की एक एफडी की मैच्योरिटी राशि अपने आधिकारिक खाते में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया. बैंक के शुरुआती रिकॉर्ड में दिखाया गया कि पैसा ट्रांसफर हो चुका है, लेकिन असल में नगर निगम के खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचा.
गहराई से जांच करने पर पता चला कि बैंक द्वारा जारी किए गए स्टेटमेंट और एफडी रसीदें (FDRs) फर्जी थीं. अधिकारियों ने पाया कि नगर निगम का पैसा असली खातों के बजाय कुछ संदिग्ध तीसरे पक्ष (Third-party) के खातों में डाइवर्ट कर दिया गया था. शुरुआती जांच में केवल ₹58 करोड़ का मामला दिख रहा था, लेकिन सभी जमा राशियों की जांच के बाद यह आंकड़ा ₹150 करोड़ के पार निकल गया.
बैंक और सरकार की कार्रवाई
इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, कोटक महिंद्रा बैंक ने कहा है कि वे अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और उन्होंने खातों का विस्तृत मिलान (Reconciliation) शुरू कर दिया है. बैंक ने इस मामले में पंचकूला पुलिस में एक औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है ताकि स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जा सके.
दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) को सौंप दी है.
बैंकिंग सुरक्षा पर उठते सवाल
यह घटना पिछले महीने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए ₹590 करोड़ के घोटाले के ठीक बाद हुई है. बार-बार हो रहे इन फर्जीवाड़ों के कारण हरियाणा सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. सरकार अब उन निजी बैंकों को सरकारी कामकाज से डी-एम्पैनल (सूची से बाहर) करने पर विचार कर रही है जो सरकारी धन की सुरक्षा में विफल रहे हैं.फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में बैंक के कुछ अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की संभावना है.


