Monday, March 16, 2026

केंद्रीय बजट 2026 में तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद बनाने का प्रस्ताव और आयुष सेंटर बनाने की घोषणा की गई है.

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नई दिल्ली: भारत के हेल्थ केयर क्षेत्र के विशेषज्ञों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं की तारीफ की. इसमें उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा को बढ़ाने के लिए 3 नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) बनाने का प्रस्ताव, कैंसर से जुड़ी 17 दवाओं पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म करने और सात और दुर्लभ बीमारियों के लिए कस्टम ड्यूटी में राहत शामिल है.

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक प्रोफेसर (Vd) प्रदीप कुमार प्रजापति ने कहा, “इस केंद्रीय बजट में आयुर्वेद क्षेत्र पर अधिक ध्यान दिया गया है. यह गर्व की बात है कि तीन नए AIIA की घोषणा की गई है. गोवा और दिल्ली AIIA को रोल मॉडल के रूप में लेते हुए, प्रस्तावित AIIA लोगों की जीवनशैली संबंधी विकार और अन्य पुरानी बीमारियों का प्रबंधन करेगा.”

वित्त मंत्री सीतारामण ने बजट में आयुष फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैबोरेटरीज को ऊंचे सर्टिफिकेशन स्टैंडर्ड पर अपग्रेड करने, आयुर्वेदिक और दूसरी पारंपरिक दवाओं के लिए क्वालिटी-एश्योरेंस इकोसिस्टम को मजबूत करने और अधिक स्किल्ड लोगों की मांग बढ़ाने की भी घोषणा की.

बजट में गुजरात के जामनगर में WHO ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन को अपग्रेड करने का भी प्रस्ताव है, ताकि वैश्विक स्तर पर ट्रेडिशनल मेडिसिन में साक्ष्य-आधारित शोध, प्रशिक्षण और जागरुकता को और बढ़ावा दिया जा सके.

बजट में प्रस्तावित पांच रीजनल मेडिकल वैल्यू टूरिज्म हब के अंदर आयुष सेंटर बनाने की भी घोषणा की गई, जिसमें डायग्नोस्टिक्स, पोस्ट-केयर और रिहैबिलिटेशन के साथ-साथ आयुष सेवाओं को बड़े मेडिकल टूरिज्म कॉम्प्लेक्स में शामिल किया जाएगा.

सीतारमण ने यह भी घोषणा की कि बुजुर्गों और उनसे जुड़ी देखभाल के लिए नए केयर इकोसिस्टम में वेलनेस और योग को जरूरी स्किल्स के तौर पर शामिल किया जाएगा. इसके लिए NSQF (राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा) से जुड़े प्रोग्राम्स के जरिये आने वाले साल में 1.5 लाख देखभालकर्ताओं (Caregivers) को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे हेल्थ वर्कफोर्स में AYUSH से जुड़ी स्किल्स को मुख्यधारा लाया जा सकेगा.

ईटीवी भारत से बात करते हुए, एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) के फोरम कोऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जीवन-विज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए भारत की प्रतिबद्धता का एक मजबूत और विश्वसनीय संकेत भेजता है.

उन्होंने कहा, “पांच साल में 10,000 करोड़ रुपये के खर्च के साथ बायोफार्मा शक्ति की घोषणा, भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक अहम कदम है, खासकर बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में, जो किफायती कीमत पर लंबी उम्र और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं.”

उन्होंने कहा कि बायोफार्मा पर फोकस करने वाला नेटवर्क बनाने, तीन नए NIPERs (राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान) बनाने, सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करने और देश भर में 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स के नेटवर्क से भारत की रिसर्च, टैलेंट और क्लिनिकल वैलिडेशन क्षमताओं में काफी मजबूती आएगी. नाथ ने कहा, “ये उपाय नवाचार से विनिर्माण तक लंबे समय से चली आ रही ढांचागत कमियों को दूर करते हैं.”

उन्होंने कहा कि बजट में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा क्षमता (Scientific Review Capacity), डोमेन स्पेशलिस्ट और समयबद्ध स्वीकृति के जरिये मजबूत करने पर जोर दिया गया है, जो नियामक पूर्वानुमान क्षमता, ग्लोबल अलाइनमेंट और निवेशक विश्वास के लिए जरूरी है.

नाथ ने कहा, “भारत की 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री, जो GDP में लगभग 2.5 प्रतिशत का योगदान देती है, के लिए यह बजट वॉल्यूम-लेड ग्रोथ से वैल्यू- और इनोवेशन-ड्रिवन लीडरशिप में बदलाव को मजबूत करता है. इन पहलों को 200 प्रतिशत तक वेटेड R&D डिडक्शन (Weighted R&D Deduction) की बहाली और एडवांस्ड तौर-तरीके, APIs, बायोसिमिलर्स और कॉम्प्लेक्स जेनेरिक्स के लिए PLI सपोर्ट के विस्तार के साथ पूरा करने से घरेलू विनिर्माण में और तेजी आएगी, आयात पर निर्भरता कम होगी, और भारत हाई-क्वालिटी, सस्ते बायोफार्मास्यूटिकल समाधान के एक भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी जगह बना पाएगा.”

नाथ के अनुसार, पहले ऐसे इंसेंटिव कभी-कभी बायोमेडिकल डिवाइस और मेडिकल इक्विपमेंट के लिए भी दिए जाते थे. उन्होंने कहा, “हम वित्त मंत्री के डी-रेगुलेशन और नियामक अनुपालन के बोझ को कम करने के आश्वासन से विनिर्माण को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सुधारों के जारी रहने की उम्मीद करते हैं, ताकि हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकें और EU (यूरोपीय संघ), EFTA (यूरोपीय मुक्त व्यापार संगठन) और UK (ब्रिटेन) के साथ हाल के FTA का फायदा उठा सकें.”

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