Saturday, March 14, 2026

कुड़मी समाज का आंदोलन शुरू हो गया है.

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गिरिडीह/बोकारो: अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर आदिवासी कुड़मी समाज के बैनर तले ‘रेल टेका डहर छेका’ आंदोलन शुरू हो गया है. इस आंदोलन का असर गिरिडीह में देखने को मिला हैं. आंदोलनकारी शनिवार की सुबह ही ग्रैंड कोड लाइन यानी दिल्ली को गया-धनबाद होते हुए कोलकाता से जोड़ने वाली ट्रैक को पारसनाथ के पास जाम कर दिया है.

सुबह ही आंदोलनकारी ट्रैक पर उतर आए हैं और नारेबाजी करते हुए ट्रैक पर बैठ गए हैं. दूसरी तरफ यह बताया जा रहा है कि डुमरी विधायक सह झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम कुमार महतो भी आंदोलन में पहुंच सकते हैं. आंदोलन में शामिल आजसू नेता यशोदा देवी भी शामिल हुई है. उन्होंने कहा कि कुड़मी समाज की मांग जायज है.

इधर, रेलवे ट्रैक जाम होने से कई ट्रेनों का पहिया थम गया. दिल्ली से आ रही दिल्ली-भुनेश्वर (22812 ) राजधानी एकस्प्रेस चौधरीबांध में रुकी हुई है. इसके अलावा कई ट्रेनों का परिचालन बाधित हुआ है.

सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम

वहीं, इस आंदोलन को देखते हुए सुरक्षा का भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. जिलाधिकारी रामनिवास यादव के साथ एसपी डॉ बिमल कुमार भी डुमरी में जमे हुए हैं. जबकि डुमरी एसडीपीओ सुमित के कुमार के साथ आरपीएफ के पदाधिकारी और जवान भी जमे हुए हैं.

बता दें कि कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने की मांग को लेकर गोलबंदी हुई है. आंदोलन के तहत शनिवार झारखंड- बंगाल और ओड़िशा में आदिवासी कुड़मी समाज के बैनर तले ‘ रेल टेका डहर छेका ‘ आंदोलन किया जा रहा है. इस आंदोलन का समर्थन में कई नेता उतर आये हैं. कांग्रेस नेता सह मांडू के पूर्व विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने समर्थन देने की घोषणा कर दी है. गिरिडीह में आंदोलन को समर्थन देने की बात जेपी ने की है.

बोकारो में भी दिखा रेल रोको आंदोलन का असर

बोकारो में भी रेल रोको आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है. चंद्रपुरा रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों की संख्या में आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं. चंद्रपुरा रेलवे स्टेशन पर सैकड़ों प्रदर्शनकारी रेल पटरियों पर बैठ गए हैं. आरपीएफ ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की, लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ

आंदोलनकारी का कहना है कि इस बार मामला आर या पार है. सरकार को झुकना ही होगा और हमारी मांगों को पूरी करनी होगी. उनका कहना है कि हमने पहले भी आंदोलन कर सरकार के सामने अपनी मांग रखी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इसलिए हमने फिर से फैसला किया है कि जब तक सरकार हमारी मांगें नहीं मान लेती, हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

हजारीबाग के चरही में आंदोलन का व्यापक असर देखने को मिल रहा है. मालगाड़ी के साथ-साथ पैसेंजर गाड़ी को भी रोक दिया गया है. मांडू विधायक निर्मल उर्फ तिवारी महतो भी आंदोलन में उतरे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से कुड़मी समाज के लोग आंदोलन कर रहे हैं. केंद्र और राज्य की सरकार कुड़मियों को छलने का काम किया है. असली आदिवासी अगर कोई है तो वह कुड़मी है.

जामताड़ा में बेवा रेलवे क्रॉसिंग के पास कुर्मी समुदाय के सैकड़ों सदस्य ढोल-नगाड़ों के साथ रेल पटरियों पर उतर आए और हिंसक प्रदर्शन किया. कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. कुर्मी समुदाय के नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई उनके अस्तित्व की है. इसके लिए आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं.

पूर्वी सिंहभूम में कुड़मी नेताओं और समर्थकों ने चंदरेखा के पास रेलवे ट्रैक जाम कर दिया, जिससे ट्रेन परिचालन बाधित हो गया. मौके पर भारी संख्या में पुलिस प्रशासन मौजूद हैं. वहीं, हावड़ा से मुंबई रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेनें काफी देर तक फंसी रही, जिससे यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

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