कालाष्टमी के दिन भक्त भगवान काल भैरव की आराधना करते हैं. काल भैरव की पूजा में कुछ विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है. यदि आप भी यह पूजा करने वाली हैं, तो इन सामग्रियों और उनके उपयोग के बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है. यह दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित होता है. इस दिन तंत्र-मंत्र साधना और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है. मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर सभी प्रकार के भय, रोग और बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
कालाष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख कालाष्टमी की तिथियां इस प्रकार हैं:
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 9 अप्रैल 2026, रात्रि 09:19 बजे से
- अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल 2026, रात्रि 11:15 बजे तक
उदया तिथि के अनुसार कालाष्टमी का व्रत और पूजा 10 अप्रैल 2026 को किया जाएगा.
पूजा सामग्री
- भगवान काल भैरव की तस्वीर या मूर्ति
- सरसों का तेल
- मिट्टी का दीपक
- काले तिल
- उड़द की दाल
- नीला या काला कपड़ा (चौकी पर बिछाने के लिए)
- लाल या नीले फूल
- धूप, अगरबत्ती, कपूर
- नारियल
- इमरती
- कड़वे तेल में बनी पूड़ी
- गंगाजल
- पंचामृत
सरल पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद व्रत का संकल्प लें. एक चौकी पर काला या नीला कपड़ा बिछाकर भगवान काल भैरव की प्रतिमा स्थापित करें. अब भगवान के सामने सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं. गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें और तिलक लगाएं. काले तिल, उड़द और फूल अर्पित करें. इमरती या नारियल का भोग लगाएं. इसके बाद आसन पर बैठकर भैरव मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें. काल भैरव अष्टकम या चालीसा का पाठ करें और व्रत कथा पढ़ें. अंत में आरती करें. यदि संभव हो तो इस दिन काले कुत्ते को रोटी जरूर खिलाएं, क्योंकि कुत्ता काल भैरव जी का वाहन माना जाता है.
भगवान काल भैरव के मंत्र
- ॐ कालभैरवाय नमः.
- ॐ हं षं णं क्षं महाकालभैरवाय नमः.
- ॐ भ्रं कालभैरवाय फट् स्वाहा.
- तिक्ष्णदंष्ट्रं महाकायं कल्पांतदहनोपमम्.
भैरवाय नमस्तुभ्यं अनुज्ञां दातुमर्हसि॥ - ॐ कालभैरवाय विद्महे काशीवासाय


