पेपर कठिन होने से जनरल व ईडब्ल्यूएस का क्वालीफाइंग कटऑफ 144 अंक पर आया, स्कोर के साथ कैंडिडेट्स की संख्या भी हुई जारी.
कोटा: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2025 का परिणाम शनिवार को घोषित कर दिया गया है. इस बार पेपर काफी कठिन होने के कारण कटऑफ में गिरावट देखने को मिली है. जनरल और ईडब्ल्यूएस कैटेगिरी की क्वालीफाइंग कटऑफ 144 अंक रही, जो पिछले साल से 18 अंक कम है. खास बात यह रही कि इस बार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहली बार न केवल स्कोर बल्कि हर स्कोर पर कितने कैंडिडेट्स हैं, इसका विस्तृत डाटा भी जारी किया है.
पहली बार जारी हुए स्कोर के अनुसार रैंक और संख्या: एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा के अनुसार, यह पहली बार हुआ है जब एनटीए ने नीट के स्कोर के साथ हर स्कोर पर कितने कैंडिडेट्स हैं, यह भी जारी किया है. इस डाटा के विश्लेषण से स्पष्ट हो रहा है कि इस बार नीट की काउंसलिंग में कटऑफ रैंक और अंक काफी नीचे जाएंगे. पहले यह माना जा रहा था कि कटऑफ पिछले साल की तुलना में करीब 100 अंक नीचे रहेगी, लेकिन अब यह गिरावट 125 अंकों तक पहुंच सकती है. उन्होंने बताया कि 525 अंकों पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिलने की संभावना काफी बढ़ गई है.
- बीते सालों की तुलना में भारी गिरावट: देव शर्मा ने बताया कि वर्ष 2024 में जनरल और ओबीसी कैटेगिरी में सरकारी एमबीबीएस की सीट 652 अंकों पर मिली थी, जबकि ईडब्ल्यूएस कैटेगरी में यह सीट 648 अंकों पर दी गई थी, लेकिन इस बार कठिन पेपर के चलते रैंक पर असर पड़ा है. उदाहरण के तौर पर 551 अंक लाने वाले कैंडिडेट्स की संख्या केवल 11,990 है. वहीं, 502 अंक तक करीब 50,000 कैंडिडेट्स हैं. इसी तरह 537 अंक लाने वाले कैंडिडेट की रैंक 19,069 है, जबकि 520 अंकों पर रैंक 32,000 के करीब पहुंच रही है. 525 अंक वालों की रैंक करीब 25,000 है.
- 525 अंकों पर मिल सकती है सरकारी मेडिकल सीट: देव शर्मा ने बताया कि इन आंकड़ों के अनुसार इस बार 525 अंक लाने वाले कैंडिडेट्स को सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट मिलने की प्रबल संभावना बन रही है. इससे लाखों की मेडिकल शिक्षा का खर्च बच सकता है. देव शर्मा ने कहा कि इतना ही नहीं 525 अंक से नीचे वालों को भी उम्मीद कायम रखनी चाहिए, क्योंकि रैंक के अनुसार नीचे वालों को भी सीट मिल सकती है
- एमबीबीएस की 1.20 लाख सीट्स होने की उम्मीद: देव शर्मा ने बताया कि देशभर में इस समय 780 मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें कुल 1,18,190 एमबीबीएस सीट्स हैं. इनमें 428 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं, जिनमें 60,124 सीट्स हैं, यानी करीब 51%. हालांकि, इनमें मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की सीट्स भी शामिल हैं. निजी और ट्रस्ट कॉलेजों की संख्या 352 है, जिनमें 58,066 सीट्स हैं. इस साल कुछ कॉलेजों में सीट्स बढ़ने की संभावना है, जिससे कुल संख्या काउंसलिंग तक 1.20 लाख तक पहुंच सकती है.
सरकारी मेडिकल कॉलेज क्यों होते हैं पसंदीदा: देव शर्मा ने बताया कि टॉप रैंक लाने वाले कैंडिडेट्स एम्स जैसे सरकारी संस्थानों को ही प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि वहां फीस महज कुछ हजारों में होती है. अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी यह फीस लाखों में होती है, लेकिन प्राइवेट कॉलेज की तुलना में काफी सस्ती होती है. वहीं, मैनेजमेंट कोटे पर यह फीस 30 से 50 लाख तक पहुंचती है. एनआरआई कोटे में यह फीस करीब 30 हजार यूएस डॉलर यानी लगभग 25 लाख रुपये सालाना तक जाती है. कुल मिलाकर एनआरआई कोटे की फीस 1.25 करोड़ रुपये तक होती है, जबकि कई निजी मेडिकल कॉलेजों में यह फीस 1.40 करोड़ रुपये तक जाती है.


