Thursday, March 19, 2026

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने 12 फरवरी को देशव्यापी बिजली हड़ताल की घोषणा की है।

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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने 12 फरवरी को देशव्यापी बिजली हड़ताल की घोषणा की है। यह हड़ताल बिजली क्षेत्र के निजीकरण और प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के विरोध में है। फेडरेशन का दावा है कि यदि सरकार ने अपना रुख नहीं बदला तो देशभर में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बिल वापस लेने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की है

रांची। देशभर के राज्य विद्युत निगमों, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए), दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में कार्यरत बिजली अभियंताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन ने बिजली क्षेत्र के निजीकरण और प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के खिलाफ 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल की घोषणा की है।

फेडरेशन का दावा है कि यदि सरकार ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया तो इस हड़ताल के कारण देशभर में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इस संबंध में फेडरेशन ने केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस सौंप दिया है।

हड़ताल की घोषणा करते हुए फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि यह आंदोलन लाखों बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों के गहरे असंतोष और चिंता की अभिव्यक्ति है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां सार्वजनिक बिजली क्षेत्र को क्रमशः कमजोर कर रही हैं।

दुबे ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि संसद के बजट सत्र के दौरान इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को पेश किया गया तो देशभर के बिजली कर्मचारी ‘लाइटनिंग एक्शन’ के तहत कार्यस्थल छोड़कर व्यापक जन आंदोलन शुरू करेंगे।

सस्ती बिजली और संघीय ढांचे पर हमला

चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बिजली देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, उद्योग और ग्रामीण जीवन की रीढ़ है। उनके अनुसार इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 और राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 सस्ती बिजली, सार्वजनिक स्वामित्व, संघीय ढांचे और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा हमला हैं। उन्होंने वितरण क्षेत्र में मल्टी लाइसेंसिंग, जबरन स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसमिशन में पीपीपी और टीबीसीबी माडल, संचालन के आउटसोर्सिंग तथा नौकरियों के ठेकेदारीकरण को बिजली व्यवस्था के लिए घातक बताया।

फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को तत्काल वापस लेने, राष्ट्रीय विद्युत नीति को निरस्त करने और बिजली निगमों के निजीकरण पर पूर्ण विराम लगाने की मांग की है। इसके साथ ही स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना वापस लेने, संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण, रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और संघीय ढांचे पर केंद्र के कथित दबाव को रोकने की भी मांग उठाई गई है।

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