Wednesday, April 15, 2026

ऐसे उद्यम जो किसी प्रौद्योगिकी, उत्पाद या सेवा के विकास के शुरुआती चरण में हैं, उन्हें मदद मिलेगी.

Share

नई दिल्ली : स्टार्टअप के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड ऑफ फंड्स दो का दायरा बढ़ाया जाएगा. इसमें कोष को चार खंडों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और विनिर्माण स्टार्टअप के लिए विशेष सहायता शामिल है. उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की अधिसूचना में यह कहा गया है.

मंत्रिमंडल ने फंड ऑफ फंड्स के दूसरे चरण को फरवरी में मंजूरी दी थी. इसका उद्देश्य उद्यम पूंजी जुटाना और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, प्रौद्योगिकी-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण स्टार्टअप और विकास के शुरुआती चरण के उद्यमों को समर्थन देना है.

स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स (एफएफएस) एक सरकारी निवेश कोष है जो सीधे स्टार्टअप कंपनियों में निवेश नहीं करता, बल्कि सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोषों को पूंजी प्रदान करता है. ये वैकल्पिक निवेशक कोष फिर स्टार्टअप में निवेश करते हैं, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलता है. फंड ऑफ फंड्स दो को स्टार्टअप में निवेश की गति को बनाए रखने के लिए तैयार किया गया है. इसका दायरा फंड ऑफ फंड्स स्कीम (एफएफएस 1.0) से अधिक है.

उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग की अधिसूचना में कहा गया, ‘‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स दो का दायरा बढ़ाया जाएगा और वास्तविक नवोन्मेष के लिए प्रमुख क्षेत्रों को लक्षित करने का क्षेत्रवार दृष्टिकोण अपनाया जाएगा.’’

यह योजना सेबी में पंजीकृत वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के कोष में योगदान देगी, जिनका उपयोग केंद्र सरकार से स्टार्टअप के रूप में मान्यता प्राप्त इकाइयों के इक्विटी और इक्विटी आधारित उत्पादों में निवेश करने के लिए किया जाएगा.

पहला खंड अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से जुड़े स्टार्टअप को समर्थन देने वाले एआईएफ पर केंद्रित होगा। अर्थात ऐसे स्टार्टअप जो जटिल समस्याओं के लिए नवीन समाधान विकसित करने में लगे हैं, जिनमें लंबे अनुसंधान एवं विकास चक्र और उच्च लागत शामिल हैं.

दूसरा खंड विकास के शुरुआती चरण के स्टार्टअप को समर्थन देने वाले छोटे एआईएफ को पूंजी प्रदान करेगा. अर्थात् ऐसे उद्यम जो किसी प्रौद्योगिकी, उत्पाद या सेवा के विकास के शुरुआती चरण में हैं.

तीसरा खंड प्रौद्योगिकी-आधारित नवोन्मेषी विनिर्माण स्टार्टअप को समर्थन देगा, जबकि चौथा खंड क्षेत्र/चरण से अप्रभावित स्टार्टअप को समर्थन देने वाले एआईएफ को कोष उपलब्ध कराएगा.

फंड ऑफ फंड्स एक की कार्यान्वयन एजेंसी रही भारतीय लघु उद्योग एवं विकास बैंक (सिडबी) ही एफएफओ 2.0 की भी कार्यान्वयन एजेंसी होगी.

इसके अतिरिक्त, योजना के कार्यान्वयन के लिए एक और घरेलू एजेंसी का चयन किया जाएगा.

योजना के कार्यान्वयन और प्रदर्शन की निगरानी के लिए डीपीआईआईटी के सचिव की अध्यक्षता में एक अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया जाएगा.

Read more

Local News