नई दिल्ली : ईरान युद्ध की वजह से घरेलू सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हुआ, तो क्या इसके बाद पेट्रोल और डीजल की भी कीमतें बढ़ेंगी. इस पर सरकारी अधिकारी की ओर से जवाब आया है.
सरकारी सूत्रों ने कहा कि वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी. उन्होंने दो टूक सोमवार को यह बात कही.
अधिकारियों ने कहा कि हालात पर सरकार की नजर बनी हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति पर नजर बनाए हुए है. उनके अनुसार इस समय न तो पेट्रोल और न ही डीजल के दाम में बढ़ोतरी संभव हैं और न ही सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव है. उन्होंने उन खबरों का भी खंडन किया जिसमें बताया गया था कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां प्राइस बढ़ाने को लेकर सरकार से अनुमति मांग रही हैं. उनका कहना है था कि इस समय जो भी बढ़ी हुई कीमतें हैं, वह तेल कंपनियां ही वहन करेंगी.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है. इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है. सूत्रों ने बताया कि जमाखोरी को रोकने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर भराने के लिए बुकिंग की न्यूनतम प्रतीक्षा अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है.
उन्होंने बताया कि एक औसत परिवार एक वर्ष में 14.2 किलोग्राम के सात से आठ एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करता है और आमतौर पर उन्हें छह सप्ताह से कम समय में उसे भराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए.
सूत्रों के अनुसार, जमाखोरी और बाजार में जानबूझकर कमी की स्थिति उत्पन्न होने से रोकने के लिए सिलेंडर भराने के लिए बुकिंग अवधि बढ़ाई गई है. उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम कंपनियों के पास एलपीजी का पर्याप्त भंडार है.
क्या कहा वित्त मंत्री ने
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि देश में मुद्रास्फीति पहले से ही अपने निचले स्तर के करीब है.
सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल और भारतीय बास्केट (अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का भारांश औसत, जिनकी खरीद भारतीय रिफाइनरी करती हैं) दोनों की कीमतों में पिछले एक वर्ष से लगातार गिरावट का रुख था. 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें तेजी आई है.
वित्त मंत्री ने कहा, “फरवरी के अंत से दो मार्च, 2026 तक कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। चूंकि भारत में मुद्रास्फीति अपने निचले स्तर के करीब है, इसलिए फिलहाल महंगाई पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है.”
वह इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि क्या सरकार ने देश में मुद्रास्फीति पर बढ़ते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों के प्रभाव की समीक्षा की है.
अमेरिका और इजराइल के 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं. हमले के जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ इजराइल पर भी हमले किए हैं.
इस सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की अक्टूबर, 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि यदि कच्चे तेल की कीमत आधारभूत अनुमानों से 10 प्रतिशत अधिक होती हैं और घरेलू कीमतों पर इसका पूरा प्रभाव पड़ता है, तो मुद्रास्फीति 0.3 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.
हालांकि, मुद्रास्फीति पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का मध्यम अवधि का प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करता है. इसमें विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाना, सामान्य मुद्रास्फीति की स्थिति और अप्रत्यक्ष प्रभाव की सीमा शामिल हैं.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित औसत खुदरा मुद्रास्फीति 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में घटकर 1.8 प्रतिशत पर रही, जबकि 2024-25 में यह 4.6 प्रतिशत और 2023-24 में 5.4 प्रतिशत थी,


