रांची: राजधानी रांची के आनंद झा ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट बिल्डाथॉन’ के कार्यरत पेशेवर वर्ग में दूसरा स्थान प्राप्त कर झारखंड का मान बढ़ाया है. देशभर से 40 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भाग लिया था. जिनमें से केवल शीर्ष छह टीमों को ग्रैंड फिनाले के लिए चुना गया. ऐसी कठिन प्रतिस्पर्धी वातावरण में आनंद झा और उनकी टीम ने अपने अभिनव समाधान से निर्णायकों को प्रभावित किया.
आनंद झा के मॉडल की सराहना
आनंद झा की टीम ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित “कृत्रिम रूप से निर्मित और मानवीय आवाज की पहचान” विषय पर एक प्रभावशाली मॉडल प्रस्तुत किया. आज के डिजिटल युग में जहां नकली ध्वनि और भ्रामक सामग्री का खतरा बढ़ रहा है, वहां उनका यह समाधान तकनीकी और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत उपयोगी माना जा रहा है. निर्णायकों ने उनके विचार की प्रासंगिकता, तकनीकी दक्षता और सामाजिक प्रभाव को विशेष रूप से सराहा.
सीनियर डेटा इंजीनियर हैं आनंद
वर्तमान में आनंद झा ‘टाइगर एनालिटिक्स’ में वरिष्ठ आंकड़ा अभियंता के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यांत्रिक अधिगम, आंकड़ा अभियांत्रिकी तथा मेघ संगणन के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव है. इसके साथ ही वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई से कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं यांत्रिक अधिगम विषय में शोध उपाधि कर रहे हैं, जिससे उनके अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा मिल रही है.
आनंद का शैक्षणिक सफर
आनंद की स्कूली शिक्षा भी रांची से ही हुई है. उन्होंने कक्षा 6 से 8 तक की पढ़ाई डीएवी बरियातू, रांची से की. इसके बाद मैट्रिक की परीक्षा डीएवी कपिलदेव, रांची से उत्तीर्ण की. इंटरमीडिएट की पढ़ाई डीएवी श्यामली, रांची से पूरी की, जहां वे शीर्ष 10 विद्यार्थियों में शामिल रहे. शुरुआती दौर से ही पढ़ाई में उनकी रुचि और मेहनत ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.
शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो आनंद ने बिरला प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान, पिलानी से आंकड़ा विज्ञान एवं अभियांत्रिकी में स्नातकोत्तर उपाधि और पीईएसआईटी, बेंगलुरु से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है. साथ ही उन्होंने पर्ड्यू विश्वविद्यालय से डेटा साइंस एवं इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर कार्यक्रम भी पूरा किया है.
कई स्टूडेंट्स को दे चुके हैं ट्रेनिंग
अपनी व्यस्त नौकरी और शोध कार्य के साथ-साथ आनंद ने ‘एनालिटिक्स विद आनंद’ नामक एक शून्य निवेश नवप्रवर्तन उपक्रम की स्थापना की. इस पहल के माध्यम से वे अब तक एक हजार से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर चुके हैं. उनका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आंकड़ा विश्लेषण की शिक्षा को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाना है, विशेषकर उन छात्रों और पेशेवरों तक जो तकनीकी पृष्ठभूमि से नहीं आते.
अपनी उपलब्धि पर आनंद झा ने कहा, “यह सम्मान मेरे लिए ही नहीं, बल्कि उन सभी विद्यार्थियों के लिए है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं. मेरा विश्वास है कि यदि सही मार्गदर्शन और सतत प्रयास हो, तो छोटे शहरों के युवा भी राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं. मेरा लक्ष्य है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शिक्षा हर इच्छुक विद्यार्थी तक पहुंचे.”
छात्रों के लिए बने प्रेरणास्रोत
राष्ट्रीय स्तर की इस सफलता के साथ आनंद झा आज देशभर के युवाओं, विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के छात्रों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बनकर उभरे हैं.


