भारत की ऊर्जा यात्रा अब केवल किसी एक स्रोत तक सीमित नहीं रह गई है. देश आज सौर पार्क, छतों पर लगे सोलर पैनल, हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट्स और आधुनिक परमाणु ढांचे के साथ एक शक्तिशाली ऊर्जा महाशक्ति के रूप में उभर रहा है. केंद्र सरकार द्वारा जारी हालिया आंकड़ों (Factsheet) के अनुसार, आर्थिक सुधारों और नीतिगत बदलावों ने देश की ‘क्लीन एनर्जी ड्राइव’ को अभूतपूर्व गति प्रदान की है.
बिजली की उपलब्धता में बड़ा उछाल
सरकारी सुधारों का सबसे सीधा प्रभाव आम जनता पर पड़ा है. साल 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की औसत उपलब्धता मात्र 12.5 घंटे थी, जो अब बढ़कर 22.6 घंटे हो गई है. इसी तरह, शहरी क्षेत्रों में अब 23.4 घंटे बिजली मिल रही है. यह प्रगति न केवल सेवाओं की विश्वसनीयता को दर्शाती है, बल्कि बढ़ते औद्योगिक और घरेलू बिजली मांग को पूरा करने की क्षमता को भी पुख्ता करती है.
सौर और पवन ऊर्जा का वैश्विक दबदबा
‘इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी’ (IRENA) की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता में विश्व में चौथे स्थान पर है.
- सौर ऊर्जा: 2014 में स्थापित सौर क्षमता मात्र 3 GW थी, जो जनवरी 2026 तक बढ़कर 140 GW के पार पहुंच गई है.
- पवन ऊर्जा: भारत की कुल पवन ऊर्जा क्षमता 54.65 GW तक पहुंच गई है, जो ग्रिड विविधीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuel) स्रोतों से प्राप्त करने का गौरव हासिल कर लिया है.
प्रमुख योजनाओं से आत्मनिर्भरता की ओर
सरकार की विभिन्न योजनाओं ने स्वच्छ ऊर्जा को जन-आंदोलन बना दिया है:
- PM सूर्य घर योजना: इस योजना के माध्यम से 23.9 लाख परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाए हैं, जिससे 7 GW स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जुड़ी है.
- PM-KUSUM: कृषि क्षेत्र में डीजल पर निर्भरता खत्म करने के लिए मार्च 2026 तक 14 लाख स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
- PLI स्कीम: घरेलू विनिर्माण को सशक्त करने के लिए ₹24,000 करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना लागू की गई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है.
ग्रीन हाइड्रोजन और परमाणु ऊर्जा का भविष्य
भारत ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत 2030 तक सालाना 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है. इसमें ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की उम्मीद है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी. वहीं, परमाणु क्षेत्र में सरकार ने ‘शांति’ (SHANTI) अधिनियम के जरिए नियमों को आधुनिक बनाया है. वर्तमान में 8.78 GW की परमाणु क्षमता को 2031-32 तक 22.38 GW और 2047 तक 100 GW तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है.
भारत का यह ऊर्जा परिवर्तन पुराने को अचानक छोड़ने के बारे में नहीं, बल्कि कदम-दर-कदम नए और टिकाऊ विकल्पों के निर्माण के बारे में है. 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, भारत आज विश्व के लिए ऊर्जा संरक्षण और नवाचार का एक आदर्श मॉडल पेश कर रहा है.


