आधुनिक जीवनशैली में जहां बच्चों के हाथों में चमकीले टूथब्रश और महंगे टूथपेस्ट आम हो चुके हैं, वहीं एक चिंता भी तेजी से बढ़ रही है-कम उम्र में ही दांतों का खराब होना. कभी हमारे बुजुर्ग बिना केमिकल युक्त उत्पादों के भी उम्रभर मजबूत दांतों के साथ जीवन बिताते थे, लेकिन आज बच्चों में दांतों की सड़न, पायरिया और मसूड़ों से खून आने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं.
अब सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या बदल गया? जिससे ये समस्याएं आती हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका जवाब हमारी जीवनशैली और परंपराओं से दूरी में छिपा है. जिला आयुष अधिकारी सिरमौर डॉ. इंदु शर्मा का कहना है कि समाधान बहुत जटिल नहीं, बल्कि बेहद सरल और प्राकृतिक है. आयुर्वेद में वर्णित दातुन, घरेलू मर्दन और ऑयल पुलिंग जैसी परंपराएं न केवल दांतों को मजबूत बनाती हैं, बल्कि मुंह की बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती हैं. यदि बचपन से ही इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाया जाएं, तो मुस्कान उम्रभर स्वस्थ और मजबूत रह सकती है.
ओवरब्रशिंग से बचें, समय तय करें
डॉ. इंदु शर्मा बताती हैं कि ‘बच्चे अक्सर लंबे समय तक जोर-जोर से ब्रश करते हैं, जिससे मसूड़े (गम्स) कमजोर हो जाते हैं. उनकी सलाह है कि ब्रशिंग का समय तय होना चाहिए. एक से दो मिनट पर्याप्त हैं. इससे ज्यादा देर तक ब्रश रगड़ना मसूड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. ओवरब्रशिंग, दातों को जोर जोर से लंबे समय तक रगड़ना दांतों को खराब कर रहा है.’
दातुन : पुरानी परंपरा, आधुनिक समाधान
आयुर्वेद में नीम, बबूल (किकर) और अकरकरा की दातुन को दांतों की सेहत के लिए बेहद लाभकारी माना गया है. नीम प्राकृतिक कीटाणुनाशक होने के कारण दांतों को सड़न से बचाने में मदद करता है, वहीं बबूल मसूड़ों को मजबूत बनाकर उन्हें ढीला पड़ने से रोकता है. अकरकरा दांतों की जड़ों को सक्रिय और सशक्त रखने में सहायक माना जाता है. जिला आयुष अधिकारी के अनुसार यदि इन पारंपरिक दातुनों का नियमित उपयोग किया जाए तो यह न केवल दांतों की सफाई करता है, बल्कि मुंह की कई समस्याओं से भी प्राकृतिक रूप से बचाव करता है.
घरेलू मर्दन: आसान और दांतों के लिए बेस्ट फॉर्मूला
डॉ. शर्मा एक सरल और असरदार घरेलू नुस्खा भी सुझाती हैं. उनके अनुसार ‘सरसों के तेल में चुटकी भर हल्दी, सेंधा नमक, थोड़ी सी फिटकरी और थोड़ा सा लौंग पाउडर मिलाकर तैयार किया गया मिश्रण दांतों के लिए बेहद लाभकारी है. इस मिश्रण से दांतों पर हल्के हाथ से मर्दन (मालिश) करने से दांत साफ होते हैं, मसूड़े मजबूत बनते हैं और पायरिया जैसी समस्याओं में राहत मिलती है. साथ ही मसूड़ों से खून निकलने की शिकायत भी धीरे-धीरे कम होती है. यह आसान उपाय केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े भी नियमित रूप से अपनाकर अपने दांतों को स्वस्थ रख सकते हैं.’
गंडूष और ऑयल पुलिंग: आयुर्वेद की प्राचीन विद्या
डॉ. इंदु शर्मा बताती हैं कि आयुर्वेद में ‘गंडूष’ का उल्लेख मिलता है, जिसमें औषधीय तरल जैसे सरसों या तिल का तेल कुछ समय तक मुंह में भरकर रखा जाता है, ताकि उसका प्रभाव दांतों और मसूड़ों पर गहराई से पड़े. यही परंपरा आज के समय में ‘ऑयल पुलिंग’ के रूप में अपनाई जा सकती है. इसमें वर्जिन नारियल तेल का भी प्रयोग किया जा सकता है. उनके अनुसार सरसों, तिल या वर्जिन नारियल, इनमें से किसी एक तेल का नियमित प्रयोग किया जा सकता है. यदि रोज कुछ मिनट तक चुने हुए तेल को मुंह में रखकर हल्का-हल्का घुमाया जाए और फिर बाहर निकाल दिया जाए, तो इससे मुंह के कीटाणु कम होते हैं, दांत मजबूत बनते हैं, सांस की दुर्गंध दूर होती है और मसूड़ों की सूजन में भी राहत मिलती है. नियमित अभ्यास से यह सरल उपाय दंत स्वास्थ्य को प्राकृतिक रूप से बेहतर बनाने में सहायक साबित हो सकता है.
मुस्कान लौटाने का समय
अंत में डॉ. इंदु शर्मा का स्पष्ट संदेश है कि छोटी-छोटी आयुर्वेदिक आदतें यदि बचपन से अपनाई जाएं तो दांतों के खराब होने की संभावना बेहद कम हो जाती है. चमकती मुस्कान सिर्फ सुंदरता नहीं, सेहत की पहचान है. शायद अब वक्त आ गया है कि हम फिर से नीम की दातुन, सरसों के तेल और ऑयल पुलिंग की ओर लौटें, ताकि आने वाली पीढ़ी की मुस्कान उम्र भर मजबूत बनी रहे.


