रांचीः 1 फरवरी को भारत सरकार आम बजट पेश करने जा रही है. इस बजट से झारखंड के अधिवक्ताओं खासकर जूनियर और नए वकीलों को खासा उम्मीदें हैं. राज्य के अलग-अलग बार एसोसिएशनों और अधिवक्ताओं ने केंद्र सरकार के समक्ष अपने सुझाव रखे हैं, जिनमें डिजिटल न्याय प्रणाली, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है.
अधिवक्ताओं का मानना है कि सरकार के “डिजिटल इंडिया” अभियान के तहत कानूनी क्षेत्र में भी बड़े डिजिटल बदलाव की जरूरत है. इसके लिए ई-कोर्ट्स परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर फंड आवंटन की मांग की गई है, ताकि डिजिटल हियरिंग, ई-फाइलिंग और वर्चुअल कार्यवाही को और अधिक सुगम बनाया जा सके. इससे न केवल न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि दूर-दराज के जिलों में कार्यरत वकीलों को भी राहत मिलेगी.
युवा वकीलों पर विशेष फोकस की मांग
झारखंड के जूनियर लॉयर्स ने बजट में अपने लिए विशेष प्रावधान की अपेक्षा जताई है. शुरुआती 2 से 3 वर्षों के संघर्ष को देखते हुए, एक निश्चित मासिक स्टाइपेंड की व्यवस्था किए जाने की मांग उठ रही है. साथ ही लैपटॉप, टैबलेट या लीगल सॉफ्टवेयर की खरीद पर टैक्स छूट या सब्सिडी देने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि युवा वकील डिजिटल दौर में खुद को सशक्त बना सकें.
सामाजिक सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
अधिवक्ताओं की सबसे बड़ी चिंता उनकी सामाजिक सुरक्षा को लेकर है. इसको ध्यान में रखते हुए सस्ती ग्रुप इंश्योरेंस योजनाओं मसलन, स्वास्थ्य और जीवन बीमा को लागू करने की मांग की गई है. इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल्स के वेलफेयर फंड में सरकारी योगदान बढ़ाने की भी अपेक्षा है, ताकि बीमारी, दुर्घटना या किसी अनहोनी की स्थिति में वकीलों और उनके परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके.
GST और कंप्लायंस में राहत की उम्मीद
कानूनी सेवाओं पर GST को लेकर भी अधिवक्ताओं में असमंजस है. बजट से उम्मीद की जा रही है कि GST दरों में स्पष्टता या रियायत दी जाएगी, जिससे क्लाइंट्स पर आर्थिक बोझ कम हो और वकीलों के लिए टैक्स कंप्लायंस आसान हो सके.
निचली अदालतों के बुनियादी ढांचे पर जोर
झारखंड के जिला और तहसील स्तर की अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है. अधिवक्ताओं ने मांग की है कि बजट में जिला अदालतों और निचली अदालतों के लिए अलग से प्रावधान हो, जिसमें वकीलों के लिए चेंबर्स, आधुनिक लाइब्रेरी, बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं शामिल हों.
कुल मिलाकर, झारखंड के अधिवक्ताओं को उम्मीद है कि आम बजट 2026 में उनके पेशेवर जीवन को आसान बनाने और न्याय प्रणाली को मजबूत करने के लिए ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए जाएंगे. अब सभी की नजरें 1 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह साफ होगा कि केंद्र सरकार अधिवक्ताओं की इन उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है.


