फिल्ममेकर आदित्य धर इन दिनों अपनी नई फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं. फिल्म की कहानी के साथ-साथ इसकी सिनेमैटोग्राफी की भी तारीफ काफी हो रही है. लोगों ने उनके फिल्म के एक्शन से लेकर एक्टिंग, हर चीज की तारीफ की है. अब डायरेक्टर ने लोगों को इस फिल्म को दमदार बनाने वाले सिनेमैटोग्राफर विकास नौलखा से मिलवाला है.
19 मार्च को रिलीज हुई फिल्म धुरंधर: द रिवेंज ने बॉक्स ऑफिस पर 1500 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है. फिल्म की शानदार सफलता के बीच फिल्म के डायरेक्टर आदित्य ने रविवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर नौलखा के साथ कई बीटीएस तस्वीरें और एक लंबा नोट शेयर किया.
आदित्य ने अपने नोट की शुरुआत में लिखा है, ‘यह विकास नौलखा के लिए है, जो धुरंधर के पीछे की आंख, समझ और आत्मा हैं.’ उन्होंने आगे लिखा है, ‘वह धुरंधर में शामिल होने वाले आखिरी HOD थे. हमारे शुरू होने से कुछ दिन पहले. और यह जानते हुए कि वह कितने सिलेक्टिव हैं, उस टाइमिंग का बहुत मतलब था. यह किसी सिनेमैटोग्राफर को ऑनबोर्ड करने जैसा कम, और सही समय पर किस्मत का चुपचाप आना ज्यादा लगा.’
आदित्य ने पुराने पल को याद करते हुए अपने नोट में लिखा है, ‘मुझे आज भी याद है कि उन्होंने स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद क्या कहा था, “मैंने ऐसी फिल्म करने के लिए 30 साल इंतजार किया है. मैं इसके लिए अपनी जान दे दूंगा.” और उनकी हर बात का मतलब था. इसके बाद सिर्फ काम नहीं, बल्कि लगन थी. नामुमकिन शेड्यूल के बीच, ऐसी उथल-पुथल के बीच जो अक्सर मैनेज नहीं हो पाती थी, एक फिल्म के समय और कीमत में दो फिल्में शूट करने के बीच, विकास इन सबके बीच खड़े रहे, मजबूत और बिना रुके. फिल्म का वजन सचमुच अपने कंधों पर उठाते हुए, अमृतसर की चिलचिलाती गर्मी और लेह की कड़ाके की ठंड में भी, उन्होंने कभी अपने विजन को कम नहीं होने दिया.’
विकास के टैलेंट के बारे में बताते हुए उन्होंने लिखा है, ‘लेकिन जो चीज विकास को सच में अनोखा बनाती है, वह सिर्फ उनका धैर्य नहीं, बल्कि उनकी नजर में छिपी आत्मा है. डिटेल पर उनकी नजर, लेंस के पीछे उनकी इमोशनल इंटेलिजेंस, यह समझने की उनकी काबिलियत कि कोई सीन सिर्फ दिखता ही नहीं, बल्कि महसूस भी होता है, यहीं उनकी प्रतिभा है. धुरंधर का हर फ्रेम इसलिए सांस लेता है क्योंकि उन्होंने उसे ऐसा करने दिया. उन्होंने सिर्फ पलों को कैप्चर नहीं किया, बल्कि उनमें जान डाल दी. सेट पर उनके इनपुट कभी जोरदार नहीं होते थे, बल्कि हमेशा सटीक होते थे. हमेशा सच बोलते थे. हमेशा फिल्म को बेहतर बनाते थे. फिल्में शूट करने वाले बहुत से लोग हैं.’
आखिर में आदित्य ने लिखा है, ‘विकास ने इसे जिया. और ऐसा करके, उन्होंने धुरंधर को कुछ ऐसा दिया है जो बनाया नहीं जा सकता, वो है- एक आत्मा. मैं उनके कलाकार होने और इस सफर में उनके साथ आए इंसानियत के लिए बहुत शुक्रगुजार, सम्मान और प्यार महसूस करता हूं. यह फिल्म हमेशा उनकी छाप छोड़ेगी. और मुझे पता है कि यह तो बस शुरुआत है, आगे हम जो कहानियां साथ मिलकर सुनाएंगे, वे और भी आगे जाएंगी, और भी ज्यादा चमकेंगी, और कुछ ऐसा बनाएंगी जो सच में हमेशा रहने वाला हो.’


