Saturday, March 28, 2026

आज स्मॉल सेविंग स्कीम्स का इंटरेस्ट रेट तय होगा. इस बार कटौती की संभावना है. वर्तमान में PPF, NSC और SSA की दरें 7-8.2% हैं.

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मुंबई: अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों का आज वित्त मंत्रालय द्वारा निर्णय किया जाएगा. इन योजनाओं में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), सुकन्या समृद्धि योजना (SSA) और सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम (SCSS) शामिल हैं. माना जा रहा है कि इस बार ब्याज दरों में कटौती की संभावना है.

क्यों घट सकती हैं ब्याज दरें?
इस साल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अब तक तीन बार रेपो रेट घटाया है. फरवरी और अप्रैल में 25-25 बेसिस प्वाइंट और जून में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई. कुल मिलाकर रेपो रेट में 1% की कमी आई है. जब रेपो रेट घटता है, तो बैंक अपनी एफडी और अन्य डिपॉजिट योजनाओं पर ब्याज दरें कम कर देते हैं. कई बैंकों ने तो हाई रेट वाली स्पेशल एफडी भी बंद कर दी हैं.

दूसरी ओर, सरकारी बॉन्ड (G-Sec) की यील्ड भी गिर गई है. 1 जनवरी 2025 को 10 साल के G-Sec की यील्ड 6.779% थी, जो 24 सितंबर 2025 तक घटकर 6.483% रह गई. श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिश के अनुसार, छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें G-Sec यील्ड के आधार पर तय की जाती हैं. उदाहरण के लिए, PPF की दर 10 साल के G-Sec यील्ड में 25 बेसिस प्वाइंट जोड़कर निर्धारित होती है. जून-सितंबर 2025 के औसत आंकड़ों के अनुसार PPF की दर 6.66% बनती है, जबकि वर्तमान में यह 7.1% है.

आखिरी बार कब बदली थीं दरें?
पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरें आखिरी बार जनवरी-मार्च 2024 तिमाही में बदली गई थीं. उस समय 3 साल की टाइम डिपॉजिट पर ब्याज 7% से बढ़ाकर 7.1% किया गया और सुकन्या समृद्धि योजना की दर 8% से बढ़ाकर 8.2% कर दी गई थी.

जुलाई-सितंबर 2025 तिमाही की मौजूदा ब्याज दरें

सेविंग डिपॉजिट – 4%

1 साल की टाइम डिपॉजिट – 6.9%

2 साल की टाइम डिपॉजिट – 7%

3 साल की टाइम डिपॉजिट – 7.1%

5 साल की टाइम डिपॉजिट – 7.5%

5 साल की RD – 6.7%

सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम – 8.2%

मंथली इनकम स्कीम – 7.4%

NSC – 7.7%

PPF – 7.1%

किसान विकास पत्र – 7.5%

सुकन्या समृद्धि अकाउंट – 8.2%

निवेशकों पर असर
छोटी बचत योजनाओं में करोड़ों लोग निवेश करते हैं, खासकर सीनियर सिटिजन, पेंशनर्स और मिडिल क्लास परिवार. ब्याज दरें घटने पर उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा. सरकार दर तय करते समय सिर्फ फॉर्मूले पर निर्भर नहीं करती, बल्कि आर्थिक परिस्थिति और जनता के हित को भी ध्यान में रखती है.

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