Tuesday, January 27, 2026

आइएसएम धनबाद ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं के लिए जियोइंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित तीन दिवसीय कार्यकारी विकास कार्यक्रम (ईडीपी) की मेजबानी की.

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धनबाद। आइआइटी (आइएसएम) धनबाद ने हाइड्रोपावर परियोजनाओं के लिए जियोइंजीनियरिंग से जुड़ी चुनौतियों पर केंद्रित तीन दिवसीय कार्यकारी विकास कार्यक्रम (ईडीपी) की मेजबानी की। यह कार्यक्रम 19 से 21 जनवरी 2026 तक संस्थान के कार्यकारी विकास केंद्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शीर्षक था-“हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट विकास के लिए जियोइंजीनियरिंग चुनौतियों के उन्नत अभ्यास”।विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ेंयह ईडीपी भारत सरकार के नवरत्न उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड, फरीदाबाद द्वारा प्रायोजित था। इसमें देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यरत एनएचपीसी के पेशेवरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य हाइड्रोपावर परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिल भू-इंजीनियरिंग समस्याओं से निपटने के लिए प्रतिभागियों की तकनीकी क्षमता को सशक्त बनाना था।

यह मंच भूवैज्ञानिक, भू-तकनीकी और भू-भौतिक अनिश्चितताओं पर विचार-विमर्श के लिए भी महत्वपूर्ण रहा, जो विशेषकर दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में परियोजनाओं की सुरक्षा, स्थिरता और दीर्घकालिक टिकाऊपन को प्रभावित करती हैं।कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. पीयूष पाल रॉय, पूर्व उत्कृष्ट वैज्ञानिक, धनबाद एवं कार्यवाहक निदेशक, सीएसआईआर-दुर्गापुर ने किया। यह आयोजन प्रो. सुकुमार मिश्रा, निदेशक, आईआईटी आईएसएम धनबाद के संरक्षण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रो. केका ओझा, डीन (सीईपी), प्रो. एस. सारंगी, विभागाध्यक्ष (एप्लाइड जियोलॉजी), प्रो. कृपामॉय सरकार, समन्वयक तथा प्रो. एस. के. पाल, सह-समन्वयक उपस्थित थे।तीन दिनों के दौरान सात प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भूविज्ञान, भू-भौतिकी, सिविल एवं खनन इंजीनियरिंग जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र प्रस्तुत किए। पहले दिन डॉ. पीयूष पाल रॉय ने सुरंग उत्खनन की आधुनिक ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग तकनीकों पर व्याख्यान दिया। प्रो. कृपामॉय सरकार ने भूस्खलन विश्लेषण और रोकथाम की न्यूमेरिकल तकनीकों पर चर्चा की, जबकि प्रो. राजीव सरकार ने जोशीमठ क्षेत्र के केस स्टडी के माध्यम से मल्टी-हैज़र्ड माइक्रो-जोनेशन पर प्रकाश डाला।

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