गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह और फ्रांस की कंपनी ‘टोटल एनर्जी’ के संयुक्त उद्यम, ‘अडानी टोटल गैस लिमिटेड’ (ATGL) ने अपने बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए गैस की कीमतों में तीन गुना तक की बढ़ोतरी कर दी है. पश्चिमी एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष और सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण कंपनी को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है.
कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
जानकारी के मुताबिक, कंपनी ने औद्योगिक गैस की कीमत ₹40 प्रति मानक घन मीटर से बढ़ाकर लगभग ₹119 प्रति SCM कर दी है. कीमतों में यह अचानक वृद्धि मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलएनजी (LNG) की कमी और महंगे वैकल्पिक स्रोतों से गैस खरीदने की मजबूरी के कारण हुई है.
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का संकट
इस मूल्य वृद्धि का सबसे बड़ा कारण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य’ में तनाव है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा और भारी मात्रा में एलएनजी के परिवहन के लिए उपयोग किया जाता है. हाल ही में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है.
ड्रोन और मिसाइल हमलों के डर से कतर को अपने एलएनजी प्लांट बंद करने पड़े हैं. भारत अपनी एलएनजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है, लेकिन समुद्री मार्ग बंद होने के कारण भारतीय खरीदार वहां से गैस नहीं मंगवा पा रहे हैं.
भारत पर असर
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88% और एलएनजी की जरूरतों का करीब 50% आयात करता है. इसमें से 50-60% एलएनजी इसी हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचती है. सप्लाई में इस बाधा के कारण ‘पेट्रोनेट एलएनजी’ और ‘गेल’ जैसी बड़ी कंपनियों ने भी आपूर्ति में कटौती की चेतावनी दी है.
गैस की कमी के कारण कई औद्योगिक इकाइयों को अब वैकल्पिक ईंधन जैसे फर्नेस ऑयल या नेफ्था का उपयोग करना पड़ रहा है, जो सामान्य गैस की तुलना में दोगुने से भी अधिक महंगे पड़ रहे हैं.
महंगाई की मार
वैश्विक तनाव का असर केवल गैस पर ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, जो जनवरी-फरवरी 2026 में औसतन $66-67 प्रति बैरल था, अब बढ़कर $84 प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
अडानी टोटल गैस का कहना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थितियों ने आपूर्ति मार्ग को प्रभावित किया है, जिससे परिचालन संबंधी कठिनाइयां पैदा हुई हैं. यदि पश्चिमी एशिया में तनाव जल्द कम नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में ऊर्जा की कीमतें और अधिक बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत की औद्योगिक उत्पादन लागत और आम जनता की जेब पर पड़ेगा.


