Saturday, March 14, 2026

हेल्दी रहने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत जरूरी है, लेकिन आजकल के बच्चे कई वजहों से ठीक से सो नहीं पाते, एक्सपर्ट्स का कहना…

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बच्चों को न सिर्फ अच्छे न्यूट्रिशन की जरूरत होती है, बल्कि उन्हें पूरी नींद की भी जरूरत होती है. हालांकि, कुछ बच्चे जल्दी सो जाते हैं, जबकि दूसरों को रात में सोने में दिक्कत होती है. अगर बच्चे ठीक से नहीं सो रहे हैं, तो इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनके बारे में माता-पिता को पता होना चाहिए.

बच्चों की नींद न आने की वजहें

  • दिन में बहुत ज्यादा नींद आना: पांच साल की उम्र तक, कई बच्चे लंच के बाद सो जाते हैं. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के मुताबिक, इससे रात में नींद खराब हो सकती है. इसलिए, बच्चों को दिन में कम समय के लिए सोने देने से रात में नींद खराब होने का चांस बढ़ जाता है.
  • खर्राटे: कई बच्चे अलग-अलग हेल्थ प्रॉब्लम, जैसे मौसमी एलर्जी और सर्दी-जुकाम की वजह से खर्राटे लेते हैं. खर्राटे लेने से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और बच्चे आधी रात को जाग सकते हैं. इसलिए, अगर बच्चे बिना खर्राटे लिए सो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वे शांति से सो रहे हैं.
  • बीमारी: बीमारी भी बच्चों के रात में ठीक से न सोने का एक कारण हो सकती है. जैसे, अगर बच्चों को सर्दी-जुकाम है, तो उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है, जिससे नींद में दिक्कत हो सकती है. इसके अलावा, कुछ बच्चों को एलर्जी और अस्थमा की वजह से नींद न आने की समस्या हो सकती है. ऐसे मामलों में, बच्चों को अपनी हेल्थ चेक करवानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
  • गैजेट्स से दूर रहें: इस पीढ़ी के बच्चे मोबाइल फोन, टीवी, वीडियो गेम और कंप्यूटर पर बहुत समय बिताते हैं. इसलिए बच्चों के कमरे में सोते समय ऐसे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स रखने से बचें. नहीं तो, बच्चे रात में टीवी देखते या गेम खेलते हुए बिताएंगे. नतीजतन, उन्हें ठीक से नींद नहीं आएगी. साइंसडायरेक्ट के एक अध्ययन में पाया गया कि नाश्ता छोड़ना, चाय पीना, इंटरनेट की लत, सोशल सपोर्ट की कमी, स्ट्रेस और सोने से पहले मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना, ये सभी खराब नींद की क्वालिटी से जुड़े कारण हैं.
  • टॉन्सिल: कुछ बच्चों को टॉन्सिल की समस्या होती है. इन बच्चों को नाक से सांस लेने में दिक्कत होती है, इसलिए वे मुंह से सांस लेते हैं. इस वजह से वे रात में बीच में जाग सकते हैं और ठीक से सो नहीं पाते.
  • नींद का इरेगुलर शेड्यूल: आपको रोज एक ही समय पर सोना चाहिए. नहीं तो, आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक गड़बड़ा जाएगी. इसलिए, स्लीप फाउंडेशन की एक स्टडी बताती है कि आपको रोज एक ही समय पर सोने की आदत डालनी चाहिए. इससे नींद न आने की समस्या नहीं होगी.
  • शारीरिक परेशानी: कमरे में रोशनी, शोर और तापमान सही लेवल पर होना चाहिए, नहीं तो नींद में खलल पड़ेगा. इसलिए, बच्चों को अपना कमरा आरामदायक बनाना चाहिए.
  • कैफीन: बच्चों को रात में चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक या कैफीन वाली चीजें देने से वे उत्तेजित हो सकते हैं और उन्हें सोने में परेशानी हो सकती है. इसलिए, बच्चों को शाम के समय कैफीन देने से बचें. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी में कहा गया है कि कैफीन वाली ड्रिंक्स नींद की क्वालिटी पर असर डाल सकती हैं.
  • डर या चिंता: अंधेरे का डर, अकेले सोने में कठिनाई या बुरे सपने बच्चों को जगाए रख सकते हैं.

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