Saturday, March 7, 2026

हिंदू परंपरा में विवाह का पहला निमंत्रण भगवान और पितरों को देने की मान्यता है.

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हिंदू परंपरा में विवाह का पहला निमंत्रण भगवान और पितरों को देने की मान्यता है. गणेश, विष्णु-लक्ष्मी, हनुमान, कुलदेवता और पितरों को न्योता देने से विवाह निर्विघ्न और सुखमय माना जाता है.विवाह हिंदू जीवन का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और शुभ संस्कार माना जाता है. इसलिए शादी की तैयारियों में सिर्फ भौतिक व्यवस्थाएं ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं का भी विशेष ध्यान रखा जाता है. हमारे धर्म में मान्यता है कि विवाह का पहला निमंत्रण कुछ विशेष देवताओं और पितरों को अवश्य देना चाहिए, ताकि पूरा विवाह समारोह बिना किसी बाधा के संपन्न हो और नवदंपति का जीवन सुखी रहे.

सबसे पहला निमंत्रण भगवान गणेश को

भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर करने वाले देवता हैं. इसलिए जैसे ही शादी के कार्ड छपकर घर आएं, सबसे पहले घर के गणेश जी के सामने दीपक जलाएं और मोदक या कोई मिठाई चढ़ाएं. इसके बाद शादी का कार्ड उनके सामने रखकर प्रार्थना करें कि विवाह में कोई विघ्न न आए. परंपरा के अनुसार मंगलवार या बुधवार को गणेश जी को निमंत्रण देना सबसे शुभ माना जाता है.

दूसरा निमंत्रण भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को

विवाह को सुख, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, और इनका आशीर्वाद विष्णु-लक्ष्मी से जुड़ा होता है. घर के पूजा स्थान में उनकी मूर्ति या तस्वीर के सामने पीले फूल, हल्दी और कुमकुम अर्पित करें और शादी का कार्ड रखें. उनसे प्रार्थना करें कि नवविवाहित जोड़े को जीवन भर सुख, वैभव और समृद्धि मिले. गुरुवार का दिन इसके लिए सबसे शुभ माना जाता है.

तीसरा निमंत्रण हनुमान जी को

हनुमान जी को संकटमोचन और रक्षक माना जाता है. वे नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर से रक्षा करते हैं. इसलिए मंगलवार या शनिवार को हनुमान मंदिर जाकर या घर में हनुमान चालीसा पढ़कर उनके सामने विवाह का कार्ड चढ़ाया जाता है. साथ में लाल फूल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित किया जाता है और उनसे विवाह की रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है.

चौथा निमंत्रण कुलदेवी या कुलदेवता को

हर परिवार के अपने कुलदेवता या कुलदेवी होते हैं, जिन्हें परिवार का रक्षक माना जाता है. मान्यता है कि उनके आशीर्वाद के बिना कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता. इसलिए उनके मंदिर में जाकर या घर में उनकी तस्वीर के सामने लाल कपड़ा बिछाकर शादी का कार्ड रखा जाता है. कुलदेवी को चुनरी और नारियल, जबकि कुलदेवता को जनेऊ अर्पित किया जाता है.

पांचवां निमंत्रण पितरों को

पितरों का आशीर्वाद भी हर शुभ कार्य के लिए बहुत जरूरी माना गया है. इसके लिए शादी का कार्ड पीपल के पेड़ के नीचे या घर की दक्षिण दिशा में रखकर पितरों से आशीर्वाद मांगा जाता है. यदि यह कार्य अमावस्या या पितृ पक्ष में किया जाए, तो इसे और भी शुभ माना जाता है.

इन सभी को निमंत्रण देते समय एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि कार्ड हमेशा लाल या पीले कपड़े पर रखा जाए. निमंत्रण देने से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और श्रद्धा के साथ प्रार्थना करें. मान्यता है कि इन पांच को सबसे पहले निमंत्रण देने से विवाह बिना किसी बाधा के संपन्न होता है और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है.

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