Friday, October 16, 2026

स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देश पर कार्रवाई, पटना के तीन चिकित्सकों से मांगा गया जवाब.

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पटना, 16 अक्टूबर 2026: बिहार के स्वास्थ्य विभाग ने पटना स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (एलएनजेपी) के तीन चिकित्सकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की है। यह कदम स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण के दौरान मिली शिकायतों और चिकित्सकों के स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाए जाने के बाद उठाया गया है।

विभाग ने तीनों चिकित्सकों को अलग-अलग ज्ञापन जारी कर आरोपों के संबंध में एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब देने का निर्देश दिया है।

जुलाई में स्वास्थ्य मंत्री ने किया था औचक निरीक्षण

जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने 7 जुलाई 2026 को पटना के राजवंशीनगर स्थित एलएनजेपी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान मिली शिकायतों के आधार पर तीन चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा गया था।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चिकित्सकों की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

तीनों चिकित्सकों पर क्या हैं आरोप?

विभागीय कार्रवाई के तहत तीन चिकित्सकों के खिलाफ अलग-अलग शिकायतों का उल्लेख किया गया है।

डॉ. राज किशोर रौशन: उन पर निर्धारित रोस्टर के अनुसार दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप है। साथ ही निजी क्लिनिक संचालित करने और इसके कारण नियमित ड्यूटी से गायब रहने की शिकायत भी की गई थी।

डॉ. श्याम किशोर: उन पर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कथित तौर पर सादे कागज पर अपने निजी अस्पताल में जाने के लिए बाध्य करने का आरोप लगाया गया है।

डॉ. अमरनाथ प्रसाद: उनके खिलाफ आकस्मिक कक्ष में भर्ती मरीजों की नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करने और मरीजों को बाहर से दवाएं लाने के लिए मजबूर करने संबंधी शिकायतें सामने आई थीं।

ये आरोप विभागीय जांच के विषय हैं। इनकी पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

एक सप्ताह में लिखित जवाब देने का निर्देश

स्वास्थ्य विभाग ने तीनों चिकित्सकों को जारी ज्ञापनों के साथ आरोपों का विवरण और संबंधित साक्ष्यों एवं दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने की जानकारी दी है।

चिकित्सकों से कहा गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर लिखित अभिकथन प्रस्तुत करें। उन्हें यह भी स्पष्ट करना होगा कि वे किन आरोपों को स्वीकार करते हैं और किनका खंडन करते हैं। यदि वे व्यक्तिगत सुनवाई चाहते हैं, तो उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।

जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी जांच

विभाग ने निर्देश दिया है कि तय समयसीमा में जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों और साक्ष्यों के आधार पर विभागीय जांच आगे बढ़ाई जा सकती है।

अंतिम कार्रवाई आरोपों की पुष्टि, जांच के निष्कर्ष और संबंधित नियमों के अनुसार तय होगी। फिलहाल विभागीय कार्रवाई शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि तीनों चिकित्सकों के खिलाफ लगाए गए आरोप अंतिम रूप से सिद्ध हो गए हैं।

सरकारी अस्पतालों में जवाबदेही पर जोर

स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति, मरीजों के साथ व्यवहार और उपचार संबंधी शिकायतों की जांच करना है। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों पर क्या निष्कर्ष निकलता है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

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