नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में बिकवाली के दबाव और घरेलू स्तर पर मांग कमजोर पड़ने का असर सोमवार को भारतीय सर्राफा बाजार पर दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी दोनों के वायदा भाव में तेज गिरावट दर्ज की गई। त्योहारों से पहले की इस गिरावट से जहां बाजार में हलचल बढ़ी है, वहीं खरीदारी करने वाले ग्राहकों को कीमतों में राहत मिली है।
MCX पर सोने का भाव ₹1.50 लाख के नीचे आया
MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा अनुबंध में सोमवार को ₹3,171 यानी 2.07 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके बाद सोने का भाव घटकर ₹1,50,106 प्रति 10 ग्राम रह गया।
बाजार में अचानक बढ़ी बिकवाली के बीच कारोबारियों ने अपने वायदा सौदों में कमी की, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा।
चांदी भी ₹6,477 प्रति किलो तक फिसली
सोने के साथ चांदी में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव ₹6,477 यानी 2.76 प्रतिशत टूटकर ₹2,28,219 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, वायदा कारोबार में पोजीशन घटाए जाने और बिकवाली बढ़ने से चांदी की कीमतों में दबाव आया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव
वैश्विक बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी रही। न्यूयॉर्क के कॉमेक्स बाजार में सोने का वायदा भाव 2.37 प्रतिशत गिरकर 4,183.18 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया।
इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 4.09 प्रतिशत घटकर 61.66 डॉलर प्रति औंस रह गई।
किन वजहों से आई इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार जानकारों के मुताबिक सोने और चांदी में गिरावट के पीछे घरेलू और वैश्विक दोनों कारक जिम्मेदार रहे। इनमें प्रमुख रूप से:
- घरेलू मांग में कमजोरी: ज्वेलर्स और बड़े खरीदारों की ओर से हाजिर बाजार में मांग कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ा।
- वैश्विक बाजार में बिकवाली: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच निवेशकों के रुख में बदलाव देखने को मिला।
- ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी संभावनाओं ने भी बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया।
आगे कैसा रह सकता है बाजार?
सर्राफा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में सोने और चांदी में लगातार तेजी के बाद मौजूदा गिरावट को बाजार का तकनीकी सुधार माना जा रहा है। हालांकि, कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई गई है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए विशेषज्ञों ने बाजार की स्थिति, जोखिम और अपनी निवेश क्षमता को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला लेने की बात कही है।
BharatSuperFastNews | बिजनेस डेस्क
