Wednesday, August 19, 2026

सेंसेक्स-निफ्टी की सपाट शुरुआत, कच्चे तेल की तेजी और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई बाजार की चिंता.

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मुंबई: वैश्विक स्तर पर बने दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को बेहद सीमित उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार की शुरुआत की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों में सतर्कता बनी हुई है।

बुधवार सुबह कारोबार शुरू होने पर सेंसेक्स 17.41 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली कमजोरी के साथ 77,218.05 के स्तर पर रहा। इसी तरह निफ्टी 2.85 अंक यानी 0.01 प्रतिशत फिसलकर 24,152.05 पर खुला।

IT शेयरों में मजबूती, ऑटो और मेटल दबाव में

बाजार की शुरुआती तस्वीर में सेक्टरवार प्रदर्शन मिला-जुला रहा। आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली और निफ्टी IT इंडेक्स करीब 0.82 प्रतिशत ऊपर कारोबार करता नजर आया। रियल्टी इंडेक्स में भी हल्की मजबूती रही।

इसके विपरीत मेटल शेयरों पर दबाव रहा और यह सेक्टर लगभग 0.35 प्रतिशत नीचे कारोबार करता दिखा। ऑटो इंडेक्स में करीब 0.14 प्रतिशत की कमजोरी रही। फार्मा, केमिकल और हेल्थकेयर से जुड़े शेयर भी शुरुआती कारोबार में मामूली गिरावट के साथ नजर आए।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

बाजार पर सबसे बड़ा बाहरी दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से जुड़ा है। मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय क्रूड महंगा हुआ है। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे आयात लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ती यील्ड ने भी निवेशकों की धारणा प्रभावित की है। अमेरिका में लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी से सुरक्षित निवेश विकल्पों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिसका असर उभरते बाजारों में विदेशी निवेश पर पड़ता है।

विदेशी संकेतों के बीच घरेलू बाजार को सहारा

वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद घरेलू बाजार के लिए कुछ सकारात्मक पहलू भी मौजूद हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास संभावनाओं और कंपनियों की आय को लेकर उम्मीदें बाजार को समर्थन दे रही हैं। घरेलू निवेशकों की लगातार भागीदारी भी बाजार में मजबूती बनाए रखने में मदद कर रही है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए बाजार में आने वाली गिरावट मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों का मूल्यांकन करने का अवसर दे सकती है। हालांकि, निवेश का फैसला व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी शुरुआती कारोबार के दौरान अपेक्षाकृत बेहतर गतिविधि देखने को मिली।

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