Friday, October 2, 2026

सीतामढ़ी के DM का अनोखा अंदाज, बच्चों के बीच बेंच पर बैठे और फर्श पर देखीं कॉपियां.

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सीतामढ़ी: सरकारी और मॉडल स्कूलों के निरीक्षण के दौरान अधिकारी आमतौर पर व्यवस्थाओं और शैक्षणिक सुविधाओं की समीक्षा करते हैं। लेकिन सीतामढ़ी के डीएम तनय सुल्तानिया का बाजपट्टी स्थित सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) का निरीक्षण बच्चों के साथ सीधे संवाद के कारण अलग नजर आया। उन्होंने कक्षाओं में पहुंचकर छात्रों के साथ बेंच पर बैठकर पढ़ाई का हाल जाना और छात्राओं के बीच फर्श पर बैठकर उनकी कॉपियां व ड्रॉइंग भी देखीं।

बच्चों के बीच बैठकर जाना पढ़ाई का माहौल

स्कूल की कक्षाओं में पहुंचे डीएम ने बच्चों से सीधे बातचीत की। उन्होंने छात्रों से पूछा कि उन्हें कौन-से विषय पसंद हैं, शिक्षक किस तरीके से पढ़ाते हैं और पढ़ाई के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी तो नहीं होती।

डीएम के बच्चों के बीच बैठने से छात्र भी सहज नजर आए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि किसी विषय को समझने में परेशानी हो तो सवाल पूछने में संकोच नहीं करना चाहिए। सीखने की प्रक्रिया में जिज्ञासा और सवाल करने की आदत को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

छात्राओं की कॉपियों में बनी ड्रॉइंग भी देखी

निरीक्षण के दौरान डीएम छात्राओं के बीच भी पहुंचे। कुछ छात्राएं अपनी कॉपियों में ड्रॉइंग बना रही थीं। डीएम उनके पास फर्श पर बैठ गए और उनकी कॉपियां देखने लगे।

उन्होंने छात्राओं से उनकी बनाई तस्वीरों के बारे में जानकारी ली और उनकी रचनात्मक रुचि को समझने की कोशिश की। अधिकारी को अपने बीच इस तरह बैठा देखकर छात्राओं में भी उत्साह नजर आया।

पढ़ाई के साथ प्रतिभा निखारने पर जोर

डीएम ने बच्चों से बातचीत के दौरान पढ़ाई के साथ उनकी रुचियों और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासा बनाए रखने और अपनी बात खुलकर रखने के लिए प्रेरित किया।

डीएम तनय सुल्तानिया ने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। सवाल पूछना, नई चीजों को समझने की कोशिश करना और अपनी रुचि के क्षेत्र में आगे बढ़ना भी सीखने का अहम हिस्सा है।

स्मार्ट क्लास और विज्ञान प्रयोगशाला का भी लिया जायजा

बच्चों से संवाद के अलावा डीएम ने मॉडल स्कूल की शैक्षणिक सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशाला, पुस्तकालय और डिजिटल शिक्षण व्यवस्था की स्थिति देखी।

उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल की जानकारी ली और यह समझने की कोशिश की कि आधुनिक शिक्षण सुविधाओं का विद्यार्थियों को कितना लाभ मिल रहा है। निरीक्षण के दौरान स्कूल की व्यवस्थाओं के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग पर भी ध्यान दिया गया।

बच्चों से संवाद बना निरीक्षण का खास हिस्सा

इस निरीक्षण की सबसे खास तस्वीरें तब सामने आईं, जब डीएम अधिकारियों के साथ औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय बच्चों के बीच बैठकर उनसे बातचीत करते दिखे। छात्रों के साथ बेंच पर बैठना और छात्राओं के पास फर्श पर बैठकर उनकी कॉपियां देखना बच्चों के लिए भी सामान्य निरीक्षण से अलग अनुभव रहा।

बच्चों की पढ़ाई, उनकी पसंद और परेशानियों के बारे में सीधे जानकारी लेने से निरीक्षण का स्वरूप संवादात्मक नजर आया। डीएम का यह सहज व्यवहार स्कूल में मौजूद विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

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