साहिबगंज: जिले में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो बड़ी परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 242 करोड़ रुपये की लागत वाली इन योजनाओं से साहिबगंज मुख्यालय से मिर्जाचौकी और ऐतिहासिक गांव भोगनाडीह तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।
पश्चिम फाटक से मिर्जाचौकी तक बनेगी नई सड़क
पथ निर्माण विभाग की ओर से जिला मुख्यालय के पश्चिमी फाटक से मिर्जाचौकी तक लगभग 20 किलोमीटर लंबी सड़क बनाने की योजना है। इस परियोजना पर करीब 154 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सड़क बेतौना, श्रीराम चौकी, करमटोला और बड़तल्ला होते हुए मिर्जाचौकी तक जाएगी।
प्रस्तावित सड़क मिर्जाचौकी रेलवे स्टेशन के पास मिर्जाचौकी-बोआरीजोर मुख्य मार्ग से जुड़ेगी, जिससे आगे भागलपुर की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिलेगी। सड़क की चौड़ाई करीब 5.5 मीटर रखी जाएगी।
शहर को मिलेगा वैकल्पिक मार्ग
इस परियोजना से रक्सी स्थान, पटवर टोला और करमटोला होते हुए बड़ी कोदरजन्ना के पास एनएच-80 से संपर्क भी स्थापित होगा। इससे जिला मुख्यालय से आसपास के गांवों तक आवागमन सुगम होगा और शहर को एक वैकल्पिक बाईपास मार्ग भी मिल सकेगा।
भविष्य में यदि यह सड़क फोरलेन नेटवर्क से जुड़ती है, तो राजमहल और मिर्जाचौकी के बीच यात्रा करने वाले लोगों को कम दूरी तय करनी पड़ेगी। परियोजना को तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है और अब इसे कैबिनेट मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।
गोपलाडीह से भोगनाडीह तक बनेगी ग्रीनफील्ड सड़क
दूसरी महत्वपूर्ण योजना के तहत पाकुड़ सीमा के पास स्थित गोपलाडीह से भोगनाडीह तक नई ग्रीनफील्ड सड़क का निर्माण कराया जाएगा। करीब 3.75 किलोमीटर लंबी इस सड़क की लागत लगभग 88 करोड़ रुपये तय की गई है।
यह सड़क 10 मीटर चौड़ी होगी। परियोजना में भूमि अधिग्रहण पर करीब 57 करोड़ रुपये और निर्माण कार्य पर लगभग 31 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जल्द ही जमीन अधिग्रहण का काम शुरू किया जाएगा।
भोगनाडीह पहुंचना होगा आसान
नई सड़क बनने से दुमका और पाकुड़ की ओर से आने वाले लोगों को भोगनाडीह पहुंचने में कम समय लगेगा। इससे क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आवागमन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य जिले के प्रमुख इलाकों को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी मजबूत हो सके।
