Sunday, June 14, 2026

सरायकेला-खरसावां जिले में रक्तदान के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है, पिछले छह वर्षों में सरायकेला ब्लड बैंक में 8624 यूनिट रक्त संग्रह किया गया.

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सरायकेला-खरसावां जिले में रक्तदान के प्रति लोगों की जागरूकता लगातार बढ़ रही है. पिछले छह वर्षों में सरायकेला ब्लड बैंक में 8624 यूनिट रक्त संग्रह किया गया, जिससे जरूरतमंद मरीजों को समय पर सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है.

 पिछले कुछ वर्षों के दौरान रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है. युवाओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा विभिन्न सरकारी विभागों की सक्रिय भागीदारी के कारण जिले में स्वैच्छिक रक्तदान की संस्कृति मजबूत हुई है. सरायकेला ब्लड बैंक द्वारा आयोजित स्वेच्छिक रक्त दान शिविरों में पिछले छह वर्षों के दौरान 8624 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया है. अस्पताल में इलाजरत मरीजों को खून की आवश्यकता पड़ने पर ब्लड बैंक से उपलब्ध कराया जाता है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल परिसर में मार्च 2020 से ब्लड बैंक का संचालन शुरू हुआ था. शुरुआती दौर में रक्त की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन लगातार जागरूकता अभियानों और स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों के कारण स्थिति में काफी सुधार आया है.

सामाजिक संगठनों की अहम भूमिका

जिले में रक्त की कमी को दूर करने के लिए विभिन्न सामाजिक संगठनों, क्लबों, स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों तथा सरकारी विभागों के सहयोग से समय-समय पर स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं. इन शिविरों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवा और आम नागरिक रक्तदान के लिए आगे आ रहे हैं. विशेष अवसरों, राष्ट्रीय पर्वों, महापुरुषों की जयंती एवं पुण्यतिथि के अवसर पर भी कई संगठन रक्तदान शिविर आयोजित कर समाज सेवा का संदेश दे रहे हैं. इससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में काफी सहायता मिल रही है. 

जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम है रक्तदान

चिकित्सकों के अनुसार दुर्घटना, प्रसव, गंभीर बीमारी, ऑपरेशन, थैलेसीमिया और अन्य कई परिस्थितियों में रक्त की आवश्यकता पड़ती है. ऐसे में स्वैच्छिक रक्तदान ही सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने का सबसे विश्वसनीय माध्यम है. विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने तथा दूसरों को इसके लिए प्रेरित करने की अपील की है. रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है, इसलिए मानव जीवन बचाने के लिए स्वैच्छिक रक्तदान अत्यंत आवश्यक है.

मरीजों को खून चढ़ाने से पहले होती है छह प्रकार की जांच

सरायकेला सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ नकुल प्रसाद चौधरी के अनुसार मरीजों को सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने से पूर्व ब्लड बैंक में संग्रहित प्रत्येक यूनिट रक्त की छह प्रकार की जांच की जाती है. इनमें ब्लड ग्रुप, एचआईवी, वीडीआरएल (सिफिलिस), मलेरिया, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी की जांच शामिल है. सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आने पर ही रक्त को ब्लड बैंक में सुरक्षित रखा जाता है. यदि किसी रक्त में संक्रमण पाया जाता है तो उसे तत्काल आदित्यपुर स्थित वेस्ट मैनेजमेंट केंद्र भेजकर नष्ट कर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा निर्धारित सभी जांच सुविधाएं सरायकेला ब्लड बैंक में उपलब्ध हैं. 

रक्तदान से नहीं आती कमजोरी : डॉ. नकुल चौधरी 

सरायकेला सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. नकुल चौधरी ने बताया कि रक्तदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ी है और बड़ी संख्या में लोग शिविरों में भाग लेकर रक्तदान कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि रक्तदान के दौरान केवल लगभग 300 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है, जिसकी भरपाई मानव शरीर कुछ ही समय में कर लेता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्तदान करने से शरीर में किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती. उन्होंने बताया कि रक्तदान करें अथवा न करें मानव शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं (रेड ब्लड सेल्स) लगभग 120 दिनों में स्वतः नष्ट होती रहती हैं. रक्तदान करने से शरीर में नए रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है, जिससे शरीर स्वस्थ रहता है. साथ ही रक्तदान के दौरान होने वाली जांच से कई संभावित बीमारियों की जानकारी भी समय रहते मिल जाती है.

वर्ष 2020 से अब तक संग्रह किए गए रक्त

  • वर्ष  : यूनिट रक्त
  • 2020 : 227
  • 2021 : 1311
  • 2022 : 1262
  • 2023 : 1096
  • 2024 : 1470
  • 2025 : 1439
  • 2026 : 648 (अब तक)

नियमित रक्तदाताओं से मिल रही प्रेरणा

जिले में ऐसे कई रक्तदाता हैं, जिन्होंने 50 से अधिक तथा 100 से अधिक बार रक्तदान कर दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत का काम किया है. अधिक बार रक्तदान करने वाले लोगों का कहना है कि रक्तदान से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि इससे जरूरतमंदों का जीवन बचाने का संतोष प्राप्त होता है. रक्तदाताओं का मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति को नियमित अंतराल पर रक्तदान करना चाहिए, क्योंकि एक यूनिट रक्त कई मरीजों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है. उनका कहना है कि युवाओं को किसी प्रकार की गलत धारणाएं से बचते हुए स्वेच्छा से रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए.

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