Thursday, April 2, 2026

सरकार ने विदेशी आभूषणों के सस्ते आयात और नियमों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सोना,चांदी और प्लैटिनम पर तत्काल आयात प्रतिबंध लगा दिए हैं.

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भारत सरकार ने देश के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए सोना, चांदी और प्लैटिनम से बने आभूषणों के आयात पर तत्काल प्रभाव से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, इन कीमती धातुओं के आभूषणों की आयात नीति को ‘मुक्त’ श्रेणी से हटाकर अब ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में डाल दिया गया है.

क्या है इस बदलाव का मतलब?
इस नए नियम का सीधा अर्थ यह है कि अब कोई भी व्यापारी या कंपनी बिना सरकारी अनुमति के विदेश से सोने, चांदी या प्लैटिनम के आभूषण नहीं मंगा सकेगी. अब इन वस्तुओं के आयात के लिए DGFT से विशेष लाइसेंस या पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा. यह प्रतिबंध इतना सख्त है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी व्यापारी ने पहले से कोई सौदा (कॉन्ट्रैक्ट) किया हुआ है या एडवांस पेमेंट भी कर दी है, तो भी उन्हें नए नियमों का पालन करना होगा और लाइसेंस लेना होगा.

क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण ‘मुक्त व्यापार समझौतों’ (FTA) का कथित दुरुपयोग रोकना है. उद्योग सूत्रों के अनुसार, कुछ आयातक भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच हुए समझौते का गलत फायदा उठा रहे थे. वे थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों से बिना किसी रत्न वाले साधारण आभूषणों के नाम पर भारी मात्रा में कीमती धातुएं कम शुल्क पर भारत ला रहे थे. इससे न केवल सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि घरेलू आभूषण निर्माताओं को भी असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था.

किसे मिलेगी छूट?
हालांकि, सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने वाली इकाइयों का ध्यान रखा है. 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख इकाइयों (EOU) और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में स्थित कंपनियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है. इसके अलावा, जो आयात ‘रत्न एवं आभूषण निर्यात योजनाओं’ के तहत किए जाते हैं, उन पर भी यह पाबंदी लागू नहीं होगी.

उद्योग की प्रतिक्रिया
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से घरेलू स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में थोड़ी हलचल देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में यह भारतीय ज्वैलरी उद्योग के लिए फायदेमंद होगा. उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि सरकार को अब लाइसेंस देने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि वास्तविक और ईमानदार कारोबारियों को अपना काम करने में कोई परेशानी न हो.

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