चरही में शिक्षक गांव और कस्बों में घूम-घूमकर छात्रों और उनके अभिभावकों को स्कूल की डेमो क्लास के बारे में बता रही है.
हजारीबाग: बड़े-बड़े निजी शैक्षणिक संस्थान की तरह अब सरकारी स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाएं छात्रों को स्कूल से जोड़ने के लिए डेमो क्लास का आयोजन कर रही हैं. संभवत: परियोजना चरही के बालिका उच्च स्कूल, झारखंड का पहला ऐसा सरकारी स्कूल है जहां शिक्षक छात्रों का एडमिशन स्कूल में कराने की कोशिश कर रही हैं. शिक्षक गांव कस्बे घूम-घूमकर छात्रों और उनके परिवार वालों को स्कूल के डेमो क्लास के बारे में बता रही हैं.
टीचर अभिभावकों से वादा कर रहे हैं कि अगर स्कूल की शिक्षा अच्छा नहीं है तो प्रवेश भी मत लेना. आलम यह है कि जिस विद्यालय में एक्का दुक्का विद्यार्थियों का प्रवेश होता था वहां यह संख्या बढ़ रही है. शिक्षकों का प्रयास रंग ला रहा है. हजारीबाग डीसी नैंसी सहाय ने भी इन शिक्षकों के हौसले को उड़ान देने की कोशिश के साथ शुभकामनाएं दी हैं.
सरकारी स्कूल में प्राइवेट स्कूल जैसा एक्सपेरिमेंट
ऐसे बड़े निजी शैक्षणिक संस्थान हैं जहां डेमो क्लास की व्यवस्था है. विद्यार्थियों को पहले यह बताया जाता है कि उन्हें किस तरह की शिक्षा दी जाएगी. छात्र संतुष्ट होते हैं तो वह उसे संस्थान में एडमिशन ले लेते हैं. यह परंपरा सरकारी स्कूलों में नहीं है. परियोजना बालिका उच्च विद्यालय चरही के शिक्षक ने सच कर दिखाई है. डेमो क्लास के नाम पर छात्रों की स्पोकन इंग्लिश, जनरल नॉलेज, सोशल स्टडीज की जानकारी दी जाती है. इसके अलावा विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुझान हो और पढ़ाई सरल हो, इसे देखते हुए म्यूजिक क्लास का आयोजन किया जाता है. विद्यार्थियों से पूछा जाता है कि स्कूल कैसा है?. विद्यार्थी संतुष्ट होते हैं और वह फिर स्कूल में प्रवेश ले लेते हैं.

हजारीबाग की परियोजना बालिका उच्च विद्यालय चरही पहला सरकारी स्कूल है, जो क्लास 9वीं में नामांकन लेने से पहले विद्यार्थियों को डेमो क्लास के लिए आमंत्रित करता है. स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षक कुमारी ममता बताती है कि यह प्रयोग करने से विद्यार्थी प्रवेश लेने के लिए पहुंच रहे हैं और उनमें उत्सुकता भी जाग रही है. विद्यार्थियों को मोबिलाइज करना किसी चुनौती से कम नहीं है. घर-घर जाकर उनके माता-पिता को शिक्षा के प्रति जागरूक करना होता है. जब बच्चियां स्कूल आती है तो उनके साथ कुछ इस कदर घुल मिल जाना होता है कि वह बार-बार स्कूल आए. यही कारण है कि डेमो क्लास क्षेत्र में हिट कर रहा है.
वही टीचर वीरेंद्र कुमार बताते हैं कि यह प्रयोग के तौर पर किया जा रहा है. शिक्षकों को मेहनत अधिक करनी होती है. जब छात्राएं स्कूल में प्रवेश लेती हैं तो बेहद खुशी होती है. डेमो क्लास के जरिए छात्रों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है.
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डेमो क्लास ने बढ़ाया छात्राओं में उत्साह
आठवीं बोर्ड की परीक्षा के बाद बच्चे घर में ही बैठे रहते हैं. रिजल्ट आने के बाद नामांकन के लिए वह तैयार करते हैं. ऐसे समय में बच्चों को सही समय का उपयोग और शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए डेमो क्लास की व्यवस्था की गई है. डेमो क्लास बच्चों को स्कूल और उसमें दी जा रही शिक्षा व्यवस्था को समझने का मौका देती है. जिससे छात्र पूरी तरह निर्भिक और निश्चित होकर स्कूल आकर पढ़ाई करते हैं.

चरही में परियोजना बालिका उच्च स्कूल की डेमो क्लास में हिस्सा लेने वाली छात्राएं भी बेहद उत्साहित हैं. उनका कहना है कि मिडिल स्कूल से हाई स्कूल में पढ़ने का अलग ही आनंद आ रहा है. शिक्षक अलग-अलग घंटों में अलग-अलग विषय की जानकारी देते हैं, जिससे पढ़ाई के प्रति उत्सुकता बढ़ रही है.
‘शिक्षकों के प्रयास की सराहना की जानी चाहिए है. मेरे संज्ञान में डेमो क्लास की बात सामने आई थी. जिससे ड्रॉप आउट के प्रतिशत में भी कमी आ सकती है. अन्य स्कूलों को भी इसे लेकर प्रेषित किया जाएगा’: नैंसी सहाय, हजारीबाग उपायुक्त
ड्रॉप आउट की समस्या में आएगी कमी
चरही के परियोजना बालिका उच्च स्कूल अंतर्गत कई पोषक स्कूल आते हैं अर्थात वहां 8वीं तक पढ़ाई होती है. 9वीं क्लास में उन्हें उच्च विद्यालय में प्रवेश देना होता है. छात्रों के सामने यह समस्या आती है कि उनके अभिभावक स्कूल नहीं भेजते हैं और ड्रॉप आउट की संख्या बढ़ जाती है. लेकिन इस प्रयोग से कहीं ना कहीं ड्रॉप आउट की समस्या में कमी आएगी.


