संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी पार्टी पर जो तंज कसा, उसको लेकर विपक्षी पार्टियां उन पर हमलावर हैं. विपक्षी पार्टियों ने कहा कि पीएम मोदी चाहते हैं कि उन्हीं मुद्दों को उठाया जाए, जिसे सत्ता पक्ष पसंद करती है. दरअसल, पीएम मोदी ने कहा था कि सदन में ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए.
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सदन में मुद्दों को उठाना और उन पर चर्चा करना नाटक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का मुख्य हिस्सा है. वायनाड सांसद प्रियंका ने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और गंभीर वायु प्रदूषण जैसी जनता की ज्वलंत समस्याओं को उठाना संसद का मूल उद्देश्य है.
उन्होंने कहा, “कुछ जरूरी मुद्दे हैं. चुनाव की स्थिति और प्रदूषण बड़े मुद्दे हैं. आइए इन पर चर्चा करें. संसद किस लिए है ? आइए इन पर चर्चा करें. यह नाटक नहीं है. मुद्दों पर बोलना, मुद्दे उठाना नाटक नहीं है. नाटक का मतलब है चर्चा की अनुमति न देना. नाटक का मतलब है जनता के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोकतांत्रिक चर्चा न होना.”
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने कहा, “क्या बीएलओ की मौतें भी ड्रामा हैं?”
विपक्ष के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘ड्रामा’ टिप्पणी पर, तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, “विपक्ष जो मांग कर रहा है वह एसआईआर पर बहस है. क्या यह नाटक है ? अगर लोगों की आवाज उठाना नाटक है, तो लोग अगले चुनाव में उन्हें जवाब देंगे. बीएलओ सहित 40 लोग मारे गए. उन्होंने ईसीआई को दोषी ठहराया है. सरकार की जवाबदेही कहां है? लोग 10 साल पहले नोटबंदी के दौरान कतारों में खड़े थे. काले धन का प्रवाह बढ़ गया है. जवाबदेही कहां है? विस्फोट हो रहे हैं, और आतंकवादी हमारे देश में प्रवेश कर रहे हैं. जवाबदेही कहां है? अनियोजित एसआईआर के कारण 40 लोग मारे गए हैं. जवाबदेही कहां है? विपक्ष सवाल पूछने के लिए कानूनी ढांचे के भीतर काम कर रहा है. सिर्फ इसलिए कि उन्होंने कुछ राज्य जीते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि वे लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. वही लोग आपको सत्ता से हटा देंगे. हम चर्चा चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि यह नाटक है!”
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा, “अच्छा ड्रामा कौन कर सकता है? नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े अभिनेता हैं. यह सबको पता है. जब सारी नीतियां धरी की धरी रह जाएंगी. क्या करेंगे? नारे ही लगाएंगे. मोदीजी चुनाव आयोग के जरिए तय करते हैं कि कौन मतदाता बनेगा और कौन उन्हें वोट देगा. 2026 में ममता बनर्जी फिर से मुख्यमंत्री बनेंगी और भाजपा को 30 सीटें भी नहीं मिलेंगी.”
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, “संसदीय लोकतंत्र का एक बुनियादी सिद्धांत है. सरकार अपनी बात रखती है, लेकिन विपक्ष अपनी बात रखता है. विपक्ष एसआईआर पर चर्चा की मांग कर रहा है. चुनाव आयोग के पास पूरे भारत में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) जारी करने का कोई कानूनी आधार नहीं है. हम इस बात पर चर्चा चाहते हैं कि चुनाव आयोग को यह एसआईआर जारी करने के लिए अपनी शक्तियां या आधार कहां से मिलता है. हमारे अनुसार, इसका कोई कानूनी आधार नहीं है. सरकार इस चर्चा के लिए सहमत क्यों नहीं है ? यही बुनियादी मुद्दा है. तभी सदन चलेगा.”
पीएम मोदी के बयान पर आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा बोले, “पीएम ने ड्रामा और हताशा की बात कही है, इसलिए उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए. मतलब विपक्ष हार की हताशा में है और उनके अंदर ये कैसी हताशा है कि वो मूल चुनावी मुद्दों पर लड़ने की बजाय कट्टा, मंगलसूत्र, भैंस और मुजरा पर लड़ रहे हैं? क्या यही प्रधानमंत्री की गरिमा है?”
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, “जब भी आप कोई बयान दे रहे हों, तो कम से कम यह तो सोचें कि आप लोग क्या कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नारेबाजी की बात कर रहे हैं. इसकी शुरुआत भाजपा ने की थी जब उन्होंने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगाए. जब पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और कई अन्य प्रधानमंत्री थे, क्या आपने उनके कार्यकाल में ऐसा कुछ देखा? क्या सदन में प्रवेश करते समय लोग उनके नाम के नारे लगाते थे? हम आंदोलन कर रहे हैं. विपक्ष का काम सरकार की नीतियों की आलोचना करना है.”
कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा, “क्या ‘ड्रामा मास्टर’ हमें सिखाएंगे ? हमें उनसे सीखने की जरूरत है कि नाटक कब और कैसे करना है…हम यह नहीं जानते क्योंकि हम दिल से काम करते हैं और बहुत जमीन से जुड़े हुए हैं…वह (पीएम मोदी) अब मनोवैज्ञानिक, सलाहकार बन गए हैं, और अब तो एक और योग्यता जोड़ ली है.”
शिवसेना (उद्धव गुट) के सांसद अनिल देसाई ने कहा, “यदि प्रधानमंत्री का बयान रचनात्मक है, तो स्वागत है. लेकिन अगर वे व्यंग्यात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं, तो ऐसी टिप्पणी करने वाले व्यक्ति को अपनी पार्टी के भीतर भी आत्मचिंतन करना चाहिए.”
कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने कहा, “सरकार चर्चा से भाग रही है, हमारे पास उठाने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जैसे प्रदूषण, लाल किला आतंकी विस्फोट, रोजगार, महोदय…हम चाहते हैं कि सरकार विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की अनुमति दे और सवालों से भागे नहीं.”
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा, “सरकार का यह दायित्व है कि वह विपक्ष को हमारे हित के मुद्दे उठाने का अवसर दे. सरकार यह तय नहीं कर सकती कि हमें कौन से मुद्दे उठाने चाहिए और कौन से नहीं... हम ऐसा कोई मुद्दा नहीं उठाएंगे जिसका भारत के लोगों से कोई लेना-देना न हो, चाहे वह दिल्ली में सुरक्षा की स्थिति हो, मुद्रास्फीति हो, टैरिफ हो, ये सभी मुद्दे भारत के लोगों के लिए वैध चिंता के विषय हैं और हम इन्हें सदन में उठाएंगे.”
प्रधानमंत्री मोदी के विपक्ष पर “ड्रामा नहीं डिलीवरी” वाले तंज पर भाजपा सांसद अरुण भारती ने कहा, “प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही कहा है क्योंकि जनता की अपेक्षा है कि संसद चलेगी और नीतियां बनेंगी. मुख्य बात यह है कि विपक्ष संसद चलाने में सहयोग करे और राष्ट्रहित में नीतियां बनेंगी.”
भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा, “अगर उन्हें नाटक करना है, तो उन्हें एक ड्रामा स्कूल और एक मंच बनाना चाहिए. वे सड़क पर भी नाटक कर सकते हैं, लेकिन यह जगह जनता के पैसों से बनी है. यहां रोज करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. यहां नाटक मत करो. अपनी हार स्वीकार करो. विश्लेषण करो, उस पर काम करो, और वापसी की बात करो. अगर वे कुछ नहीं कर सकते, तो उन्हें जाकर प्रधानमंत्री के जीवन पर एक क्लास लेनी चाहिए. उनका जीवन बदल जाएगा, मैं इसकी गारंटी देता हूं.”


